Thursday, July 09, 2026 10:18:20 PM

लखनऊ साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश
लखनऊ साइबर ठगी गिरोह का मुख्य सरगना गिरफ्तार, एक साल में 200 करोड़ की ठगी का आरोप

लखनऊ में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर चलाकर 200 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन मुख्य आरोपी कोलकाता से गिरफ्तार किए गए हैं।

लखनऊ साइबर ठगी गिरोह का मुख्य सरगना गिरफ्तार एक साल में 200 करोड़ की ठगी का आरोप
लखनऊ साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश |

लखनऊ में इंटरनेशनल कॉल सेंटर की आड़ में विदेशियों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना विनीत वशिष्ठ, उसकी गर्लफ्रेंड रिंकी दास गुप्ता और उसके पार्टनर नायकर जयराज को पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार किया है। विनीत पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने समिट बिल्डिंग के दो हिस्से करीब 3 करोड़ रुपये सालाना किराए पर लेकर फर्जी कॉल सेंटर चलाया था। यहां 119 कर्मचारियों की टीम काम करती थी, जो विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करती थी। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने करीब एक साल में 200 करोड़ रुपये की ठगी की।

एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि 1 जुलाई को पुलिस ने कॉल सेंटर पर छापा मारकर 119 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मुख्य आरोपी विनीत वशिष्ठ, नायकर जयराज और रिंकी दास गुप्ता की तलाश जारी थी। बुधवार को तीनों को कोलकाता के एक रिसॉर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से एक आईपैड, दो एप्पल आईफोन और 5 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

पुलिस जांच में पता चला कि छापेमारी के बाद आरोपी लखनऊ से फरार होकर कोलकाता पहुंच गए थे। विनीत और जयराज ने अपने मोबाइल फोन नदी में फेंक दिए, जबकि रिंकी ने सिर्फ सिम कार्ड फेंककर नया सिम लिया और उसी से रिसॉर्ट की बुकिंग की। इसी बुकिंग के आधार पर पुलिस को उनकी लोकेशन मिली और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में नायकर जयराज ने बताया कि वह पांचवीं कक्षा में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ चुका था। रिंकी ने नौवीं तक पढ़ाई की है, जबकि विनीत की शैक्षिक योग्यता की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। पुलिस के मुताबिक, जयराज और विनीत पिछले करीब 10 साल से एक-दूसरे को जानते हैं, जबकि रिंकी की मुलाकात विनीत से काम के दौरान हुई थी और बाद में दोनों रिश्ते में आ गए।

जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन 'चार्ल्स' नाम का व्यक्ति करता था। हालांकि, गिरोह का कोई भी सदस्य आज तक उससे आमने-सामने नहीं मिला। वह केवल व्हाट्सएप कॉल के जरिए निर्देश देता था और भारत में मौजूद टीम उसके निर्देशों के अनुसार काम करती थी।

पुलिस के अनुसार, विदेशी लोगों के संपर्क नंबर व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए टीम तक पहुंचते थे। ठगी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होती थी। गिरोह ठगी से मिले पैसे का लेनदेन हवाला के जरिए करता था। रिंकी दास गुप्ता इस रकम का देश और विदेश में सेटलमेंट कराती थी।

जांच में यह भी पता चला कि विनीत वशिष्ठ, विक्रम परमार और ललित खेराजानी उर्फ रोडी कॉल सेंटर का संचालन करते थे। जयराज के नाम पर ऑफिस का रेंट एग्रीमेंट कराया गया था, जबकि रिंकी कोलकाता में सैलून और 'टॉक्सिक' नाम से एक बार भी संचालित करती है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों और मुख्य सरगना चार्ल्स की तलाश की जा रही है।


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