राज्यपाल ने बेटियों की सुरक्षा पर जताई चिंता |
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समाज में बेटियों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों पर चिंता जताते हुए लोगों से अधिक संवेदनशील बनने की अपील की। उन्होंने हाल ही में 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि समाज में करुणा और जिम्मेदारी की भावना होती, तो ऐसी घटनाएं नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि एक 13 साल की बच्ची के साथ कई दिनों तक दुष्कर्म होता रहा, लेकिन होटल मालिक ने अपना दायित्व नहीं निभाया। अगर समाज इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आगे नहीं आएगा, तो फिर कौन आएगा। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे छोटी बच्चियों से अधिक संवाद करें, ताकि वे किसी गलत संगत में न फंसें।
राज्यपाल भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने एक प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक नवजात बच्ची को उसके परिवार ने झाड़ियों में छोड़ दिया था, लेकिन एक सब्जी विक्रेता ने उसे अपनाकर पढ़ाया-लिखाया। आज वही बेटी आईएएस अधिकारी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे सकारात्मक उदाहरणों से सीख लेनी चाहिए।
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक तैयार करना है, जो समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा करें। उन्होंने विश्वविद्यालय से पिछले एक वर्ष में किए गए 71 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एमओयू की प्रगति का भी विवरण मांगा।
दीक्षांत समारोह के बाद राज्यपाल मां-बेटी सम्मेलन में भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक माहौल में मां और बेटी के बीच खुला संवाद बेहद जरूरी है। इससे परिवार में विश्वास बढ़ता है और बेटियां जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से तीन संकल्प लेने का आग्रह किया—भारतीय भाषाओं का सम्मान और संवर्धन करें, अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करें तथा जीवन में सत्य, संवेदना, करुणा और नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दें।
समारोह में मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बाद भी व्यक्ति गलत रास्ते पर जा सकता है, इसलिए दीक्षा और अच्छे संस्कार जीवन में महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने युवाओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि सच्चे प्रेम में ब्रेकअप नहीं होता। बेटियों को सावधानी से जीवन जीना चाहिए और बेटों को भी गलत रास्तों से बचना चाहिए।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि डिग्री और पदक पाने वाले विद्यार्थियों को समाज के लिए आदर्श बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है और शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि व्यवहार से भी मिलती है।
इस दौरान समारोह में कुछ विद्यार्थियों ने राज्यपाल से पदक नहीं दिलाए जाने का विरोध किया। विरोध बढ़ने पर उच्च शिक्षा मंत्री को अपना भाषण रोकना पड़ा। इसके बाद राज्यपाल ने मंच से सभी से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि यदि सभी नहीं बैठे तो कार्यक्रम समाप्त करना पड़ेगा। बाद में पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को शांत कराया, जिसके बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा।