Thursday, July 09, 2026 09:15:38 PM

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा
अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, हमलों के बाद समझौता टूटने का दावा

होर्मुज स्ट्रेट में हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों देशों की सैन्य कार्रवाई और समझौता खत्म होने के दावे से मध्य-पूर्व में हालात और गंभीर हो गए हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा हमलों के बाद समझौता टूटने का दावा
अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा |

अमेरिका और ईरान के बीच तीन सप्ताह पहले 17 जून 2026 को हुआ समझौता (MoU) अब संकट में दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 7 और 8 जुलाई की दरमियानी रात मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया। होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हो गई।

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए जवाबी कार्रवाई में 80 से अधिक ईरानी ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल बैटरियां और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया। खार्ग द्वीप, केश्म द्वीप, बंदर अब्बास और सिरिक में भी विस्फोट की खबरें सामने आईं।

इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर 85 मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। इसके बाद बहरीन और कुवैत में एयर रेड अलर्ट जारी किया गया।

तनाव के बीच अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर दी गई छूट भी वापस ले ली। वहीं, तुर्किये में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब समाप्त हो चुका है। इसके बाद 9 जुलाई को अमेरिका ने ईरान पर दूसरी बार हवाई हमले किए।

इस पूरे घटनाक्रम में खार्ग द्वीप सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होता है। यही वजह है कि अमेरिका की संभावित कार्रवाई और ईरान की चेतावनियों के कारण इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना और ईरान की सैन्य क्षमता को सीमित करना चाहता है। वहीं, ईरान इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है और इसे अपनी रणनीतिक ताकत मानता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तनाव और बढ़ता है तो इसके गंभीर वैश्विक प्रभाव हो सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आई है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा हो सकता है। इसके अलावा रुपये, शेयर बाजार और महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, ईरानी तेल की बिक्री पर रोक लगने से भविष्य में भारत की संभावित तेल खरीद योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।


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