Saturday, June 20, 2026 07:48:23 PM

किडनी लीवर दान कर बेटियों ने रची मिसाल
दो बेटियों ने किडनी-लीवर दान कर पिता को दिया नया जीवन

गाजियाबाद के मोरटा गांव में दो बेटियों ने अपने पिता की जान बचाने के लिए एक ने किडनी और दूसरी ने लीवर का हिस्सा दान किया। नोएडा में सफल ट्रांसप्लांट के बाद परिवार में खुशी का माहौल है।

दो बेटियों ने किडनी-लीवर दान कर पिता को दिया नया जीवन
किडनी लीवर दान कर बेटियों ने रची मिसाल |

फादर्स डे से पहले गाजियाबाद के मोरटा गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। यहां दो बेटियों ने अपने पिता की जान बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया। एक बेटी ने अपनी किडनी दान की और दूसरी ने अपने लीवर का हिस्सा देकर पिता को नया जीवन दिया।

पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी

45 वर्षीय जयंत त्यागी, जो पहले भाजपा के सेक्टर संयोजक रह चुके हैं और अब व्यवसाय करते हैं, पिछले करीब एक साल से बीमार थे। जांच में पता चला कि उनकी किडनी और लीवर दोनों गंभीर रूप से खराब हो चुके हैं और उन्हें जल्द ट्रांसप्लांट की जरूरत है।

बेटियों ने कहा: पिता नहीं रहेंगे तो सब बेकार है

22 वर्षीय रिषिका त्यागी

बीटेक पूरी कर चुकी रिषिका ने अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया। 19 वर्षीय खुशी त्यागी बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा खुशी ने अपने लीवर का हिस्सा देने की इच्छा जताई। दोनों बेटियों ने परिवार से कहा: “अगर पिता ही नहीं रहेंगे, तो बाकी सब कुछ अर्थहीन हो जाएगा।”

बड़ी बेटी को ससुराल का भी मिला साथ

रिषिका की शादी कुछ महीनों में होने वाली है। परिवार को चिंता थी कि कहीं यह फैसला उसके भविष्य को प्रभावित न करे। लेकिन उसके होने वाले ससुराल वालों ने न केवल इस फैसले का समर्थन किया, बल्कि कहा कि उन्हें ऐसी साहसी बेटी पर गर्व है।

जांच में दोनों बेटियां बनीं उपयुक्त डोनर

डॉक्टरों ने परिवार के कई लोगों की जांच की। सभी मेडिकल टेस्ट और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिषिका और खुशी को सबसे उपयुक्त डोनर माना गया।

नोएडा में सफल रहा ट्रांसप्लांट

नोएडा के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चली जटिल सर्जरी में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट एक साथ सफलतापूर्वक किया।

फिलहाल जयंत त्यागी और खुशी आईसीयू में निगरानी में हैं, जबकि रिषिका की हालत सामान्य बताई गई है। डॉक्टरों के अनुसार सभी की रिकवरी अच्छी चल रही है।

गांव और सोशल मीडिया पर सराहना

इस घटना के बाद पूरे गांव में दोनों बेटियों के साहस और त्याग की चर्चा हो रही है। भाजपा कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुंचे और जरूरत पड़ने पर रक्तदान किया। सोशल मीडिया पर लोग इसे पिता-बेटियों के अटूट रिश्ते, संस्कार और समर्पण का अनोखा उदाहरण बता रहे हैं।

यह कहानी बताती है कि बेटियां सिर्फ परिवार की शान नहीं, बल्कि मुश्किल समय में सबसे बड़ा सहारा भी बनती हैं।


सम्बन्धित सामग्री






हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें!

विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनें