Saturday, July 18, 2026 01:44:33 AM

टेलीग्राम पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने दी मंजूरी
दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर अस्थायी रोक को बरकरार रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर लगी अस्थायी रोक को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए यह फैसला लिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर अस्थायी रोक को बरकरार रखा
टेलीग्राम पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने दी मंजूरी |

दिल्ली हाईकोर्ट ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 69A के तहत कार्रवाई करते समय सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और उसके पास प्लेटफॉर्म की पहुंच सीमित करने का अधिकार था।

जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि मामले की आपात स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा दिए गए कारण पर्याप्त थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर आदेश को गलत नहीं ठहराया जा सकता कि संबंधित पक्ष को प्रतिबंध के कारणों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।

सरकार का फैसला कानून के अनुरूप

हाईकोर्ट ने माना कि सरकार का निर्णय परिस्थितियों के अनुरूप और कानूनी रूप से उचित था। अदालत ने कहा कि टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध आनुपातिक (Proportionate) था और सरकार ने उपलब्ध विकल्पों में सबसे कम प्रतिबंधात्मक उपाय अपनाया। कोर्ट के अनुसार, आदेश ठोस तथ्यों और कारणों पर आधारित थे तथा इनमें किसी तरह की लापरवाही या गैर-गंभीर विचार (Non-Application of Mind) नहीं पाया गया।

फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आईटी एक्ट के तहत टेलीग्राम जैसे डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म भी “सूचना” की परिभाषा में आते हैं। इसलिए विशेष परिस्थितियों में सरकार को ऐसे प्लेटफॉर्म की पहुंच सीमित करने का अधिकार है।

NEET परीक्षा के मद्देनजर लगाया गया प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने NEET परीक्षा को देखते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य वैध उद्देश्यों से जुड़े मामलों में धारा 69A के तहत सरकार को कार्रवाई करने की शक्ति प्राप्त है और इस मामले में उसी शक्ति का इस्तेमाल कानून के अनुसार किया गया।

22 जून तक सेवाएं बंद रखने का आदेश

टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत पूरे भारत में उसकी सेवाएं 22 जून तक अस्थायी रूप से रोकने और 30 जून तक मैसेज-एडिटिंग फीचर बंद रखने का निर्देश दिया गया था। कंपनी का कहना था कि ये पाबंदियां जरूरत से ज्यादा हैं और इससे लाखों उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं।

सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम के प्लेटफॉर्म का बार-बार परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों में गलत इस्तेमाल हो रहा था। सरकार के अनुसार, इमरजेंसी ब्लॉकिंग शक्तियों का उपयोग करने के अलावा कोई अन्य प्रभावी विकल्प नहीं बचा था।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि यह कदम सभी अन्य विकल्पों को आजमाने के बाद उठाया गया। गैरकानूनी कंटेंट हटाने के लिए कई बार अनुरोध किए गए, लेकिन वे पर्याप्त साबित नहीं हुए।

1.46 लाख अकाउंट्स तक थी पहुंच

केंद्र सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने टेलीग्राम के कई ऐसे चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स की पहचान की थी, जो कथित तौर पर NEET के प्रश्नपत्र बेचने और परीक्षा से जुड़े घोटालों में शामिल थे। इनकी कुल पहुंच करीब 1.46 लाख अकाउंट्स तक थी और ये उम्मीदवारों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले खुलेआम पैसे मांग रहे थे।

सरकार ने कहा कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जा रही परीक्षा की निष्पक्षता, पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। इसी उद्देश्य से यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया है।


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