बच्चा तस्करी गिरोह के 8 आरोपी गिरफ्तार |
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट स्थित वेटिंग हॉल से अगवा किए गए डेढ़ साल के मासूम कार्तिक को दिल्ली पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एक संगठित बच्चा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवा उर्फ गौरव, धर्मेंद्र, अकील, प्रीति शर्मा, पूजा, आरती, विशाल और जिया के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, 24 मई की सुबह गाजियाबाद निवासी चंदा कुमारी अपने डेढ़ साल के बेटे कार्तिक के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में रुकी हुई थीं। सुबह जब उनकी नींद खुली तो बच्चा वहां नहीं था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को अपहरण की शिकायत दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे पुलिस की टीम ने जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर तीन संदिग्ध बच्चे को स्टेशन से बाहर ले जाते दिखाई दिए। पुलिस ने करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की और आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया।
जांच में सामने आया कि आरोपी पहले बैटरी रिक्शे से मोरी गेट पहुंचे, फिर ऑटो से शास्त्री पार्क और उसके बाद गाजियाबाद के कासिम विहार गए। बाद में वे दोबारा शास्त्री पार्क लौटे और ट्रक में लिफ्ट लेकर हरिद्वार भाग गए।
इसी दौरान हरिद्वार में एक अन्य बच्ची के अपहरण की सूचना मिली। वहां के संदिग्धों के चेहरे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन मामले के आरोपियों से मेल खाते थे। इसके बाद पुलिस ने डिजिटल फोरेंसिक जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और कई राज्यों में छापेमारी कर पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में पता चला कि जिया, विशाल और शिवा रेलवे स्टेशन समेत अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों से बच्चों का अपहरण करते थे। इसके बाद बच्चों को गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। आरती और उसकी बहन पूजा बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल थीं, जबकि धर्मेंद्र, उसकी पत्नी प्रीति और अकील बिचौलियों की भूमिका निभाते थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अकील ने खुद को बच्चे का पिता बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी।
पुलिस के मुताबिक, पूजा ने अपनी बहन आरती के लिए अपहृत बच्चे को खरीदने की व्यवस्था कराई थी। उसने अपहरणकर्ताओं और खरीददार के बीच संपर्क कराया और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए थे।
फिलहाल पुलिस गिरोह के नेटवर्क और अन्य संभावित मामलों की जांच कर रही है।