Thursday, June 11, 2026 10:17:48 PM

फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग ठगी गिरोह का भंडाफोड़
फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग वेबसाइटों से साइबर ठगी का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग वेबसाइटों से ठगी करने वाले साइबर गिरोह का भंडाफोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग वेबसाइटों से साइबर ठगी का भंडाफोड़ तीन आरोपी गिरफ्तार
फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग ठगी गिरोह का भंडाफोड़ |

दिल्ली पुलिस के साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन हेलीकॉप्टर और ट्रैवल बुकिंग वेबसाइटों के माध्यम से देशभर के लोगों को निशाना बनाकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।

20,328 रुपये की ठगी की शिकायत से शुरू हुई जांच

मामले का खुलासा एक पीड़ित की शिकायत के बाद हुआ, जिसमें उससे 20,328 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट तैयार कर उसे सरकारी अथवा अधिकृत ट्रैवल पोर्टल जैसा स्वरूप दिया और यात्रा बुकिंग का झांसा देकर रकम वसूल ली।

शिकायत के आधार पर साउथ जिला साइबर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।

तकनीकी जांच में सामने आए अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल पेमेंट चैनलों, डोमेन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, ईमेल खातों, आईपी लॉग और होस्टिंग सर्विस से प्राप्त तकनीकी जानकारियों का गहन विश्लेषण किया।

तकनीकी निगरानी और सर्विलांस के जरिए पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर बिहार के नालंदा जिले से ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार को गिरफ्तार किया गया।

फर्जी वेबसाइट तैयार कर लोगों को बनाते थे शिकार

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का एक अन्य प्रमुख सदस्य श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम फर्जी वेबसाइटों को तैयार करने और उन्हें संचालित करने का काम करता था। पुलिस ने उसे बाद में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार कर लिया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापन चलाकर लोगों को इन फर्जी वेबसाइटों तक पहुंचाते थे। वेबसाइट पर पहुंचने के बाद लोगों से हेलीकॉप्टर या ट्रैवल बुकिंग के नाम पर पैसे लिए जाते थे। इसके बाद रिफंड, प्रोसेसिंग या अतिरिक्त शुल्क के बहाने उनसे और रकम वसूली जाती थी।

म्यूल बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर होता था पैसा

पुलिस के अनुसार, ठगी से प्राप्त धनराशि को म्यूल बैंक खातों और विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पैसों के स्रोत और अंतिम गंतव्य का पता लगाना कठिन हो जाए।

जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़ी लगभग 30 शिकायतों की पहचान की गई है, जिनमें करीब 10 लाख रुपये की साइबर ठगी होने की बात सामने आई है।

मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल साक्ष्य बरामद

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 8 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 1 आईपैड, कई एटीएम और डेबिट कार्ड सहित महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।

इसके अलावा, शिकायतकर्ता से ठगे गए 20,328 रुपये की राशि को संबंधित बैंक खाते में फ्रीज भी कर दिया गया है।

जांच जारी, नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश

दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खुलासे की ओर संकेत करती है। पुलिस अब गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुटी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं


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