पटना में छात्र आंदोलन और राजनीतिक टकराव |
बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रदर्शनों के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन खत्म होने के कुछ घंटों बाद AISA के बैनर तले छात्र डाकबंगला चौराहे पर पहुंचे और राजभवन की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल, वाटर कैनन और सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पटना आईजी की एस्कॉर्ट गाड़ी पर हमला कर दिया। इसके बाद पटना आईजी ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को हिरासत में लेने के निर्देश दिए। हालात उस समय और बिगड़ गए जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया।
प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनकी अन्य मांगों में सभी पेपर लीक मामलों की फास्ट ट्रैक जांच, शिक्षा में भ्रष्टाचार और निजीकरण पर रोक, जंतर-मंतर छात्र आंदोलन का समर्थन, 7.5 CGPA की अनिवार्यता खत्म करना, फीस वृद्धि वापस लेना, पीएचडी शोधार्थियों के लिए नॉन-नेट फेलोशिप लागू करना और पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखना शामिल है।
इसी दौरान अशोक राजपथ पर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता भी आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें लाठी-डंडे चले और पथराव भी हुआ। घटना में कई लोगों के घायल होने की सूचना है। पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।
भाजपा का आरोप है कि उनके कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण विरोध के लिए पहुंचे थे, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पहले से तैयारी कर हमला किया। वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्र विरोधी है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।