Thursday, July 02, 2026 10:25:55 PM

वाराणसी से चुनाव पर आदित्य ठाकरे का बयान
आदित्य ठाकरे के वाराणसी वाले बयान से बढ़ी सियासी चर्चा, क्या पीएम मोदी को चुनौती देने की तैयारी?

आदित्य ठाकरे के वाराणसी से चुनाव लड़ने वाले बयान ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। उनके बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की संभावित मंशा के तौर पर देखा जा रहा है।

आदित्य ठाकरे के वाराणसी वाले बयान से बढ़ी सियासी चर्चा क्या पीएम मोदी को चुनौती देने की तैयारी
वाराणसी से चुनाव पर आदित्य ठाकरे का बयान |

'ऑपरेशन टाइगर' के बाद शिवसेना (यूबीटी) लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। इसी बीच पार्टी के युवा नेता और वर्ली से विधायक आदित्य ठाकरे का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

जब आदित्य ठाकरे से पूछा गया कि क्या वह अगला चुनाव भी वर्ली से ही लड़ेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, "अगर आप कहेंगे तो मैं वाराणसी से लड़ूंगा।" उनके इस बयान को कई राजनीतिक जानकार भविष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने की संभावित इच्छा के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वाराणसी केवल एक संसदीय सीट नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ है। गंगा घाटों के विकास, काशी विश्वनाथ धाम परियोजना और कई बड़े विकास कार्यों के कारण वाराणसी मोदी की राजनीतिक पहचान का अहम केंद्र बन चुका है। ऐसे में वहां भाजपा का चुनाव केवल पार्टी का नहीं, बल्कि सीधे मोदी के नेतृत्व का चुनाव माना जाता है।

वर्ली में भी आसान नहीं रही थी राह

आदित्य ठाकरे 2019 में पहली बार मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। उस समय शिवसेना और भाजपा का गठबंधन उनके साथ था। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना का पारंपरिक वोट बैंक बंट गया, जिससे मुकाबला पहले की तुलना में काफी कठिन हो गया।

हालांकि आदित्य ठाकरे अपनी सीट बचाने में सफल रहे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि ठाकरे परिवार की भावनात्मक पकड़ और पार्टी का पारंपरिक संगठन साथ नहीं होता, तो वर्ली सीट पर भी चुनौती और बड़ी हो सकती थी।

ऐसे में कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जो नेता अपनी पारंपरिक सीट पर कड़े मुकाबले का सामना कर चुका हो, उसका सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके सबसे मजबूत चुनावी क्षेत्र में चुनौती देने की बात राजनीतिक रूप से बेहद कठिन मानी जाती है।

उद्धव ठाकरे के बयान की भी हो रही चर्चा

इसी बीच हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का एक बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा था कि अगर भविष्य में देवेंद्र फडणवीस प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनते हैं, तो उनकी पार्टी उनका समर्थन करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा में ऐसा होना आसान नहीं है और पार्टी नेतृत्व इसकी अनुमति नहीं देगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उद्धव ठाकरे का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि शिवसेना (यूबीटी) राष्ट्रीय राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों की संभावनाओं पर भी नजर बनाए हुए है।

बयानों से तेज हुई राजनीतिक बहस

आदित्य ठाकरे का वाराणसी से चुनाव लड़ने वाला बयान और उद्धव ठाकरे का देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिया गया बयान, दोनों ने महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। एक ओर पार्टी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक रुख दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के भीतर संभावित राजनीतिक बदलावों पर भी नजर रख रही है।

फिलहाल आदित्य ठाकरे के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस जरूर छेड़ दी है कि क्या यह भविष्य की रणनीति का संकेत है या फिर केवल एक राजनीतिक बयान।


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