Wednesday, July 22, 2026 03:59:37 AM

भाजपा की नई प्रदेश टीम का ऐलान
भाजपा की नई प्रदेश टीम घोषित, नए चेहरों के साथ साधा गया जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का प्रयास

भाजपा की नई प्रदेश टीम में नए चेहरों को मौका मिला, लेकिन जातीय संतुलन, महिलाओं की भागीदारी और कुछ नियुक्तियों को लेकर सवाल भी उठे।

भाजपा की नई प्रदेश टीम घोषित नए चेहरों के साथ साधा गया जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का प्रयास
भाजपा की नई प्रदेश टीम का ऐलान |

लंबे इंतजार, कई दौर की बैठकों और लगातार चली चर्चाओं के बाद भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया गया है। करीब छह महीने की तैयारी के बाद घोषित इस टीम में नए और पुराने नेताओं का मिश्रण देखने को मिला है। टीम के गठन में प्रभावशाली नेताओं के बीच सामंजस्य, समझौते और संतुलन की झलक साफ दिखाई देती है। साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, हालांकि इसमें पूरी तरह सफलता नहीं मिल सकी। दूसरे दलों से भाजपा में आए नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय बचा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लंबे समय से संगठन में पद संभाल रहे कई नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका देने की कोशिश की है। कुछ नेताओं को पदोन्नति देकर संगठन में नई ऊर्जा लाने और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने का प्रयास भी किया गया है। हालांकि, नई टीम में कुछ ऐसे नाम भी शामिल किए गए हैं, जिनको लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे हैं।

नई कार्यकारिणी में विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र एवं नोएडा विधायक पंकज सिंह को जगह नहीं मिली है। उनकी जगह उनके छोटे भाई नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसे टीम चयन में बड़े नेताओं के प्रभाव का उदाहरण माना जा रहा है।

संगठन में बदलाव का संदेश देने के लिए पुरानी टीम के आधे से अधिक पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। हालांकि, जातीय प्रतिनिधित्व को लेकर नई टीम पर सवाल भी उठ रहे हैं। पार्टी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले पिछड़े, अति पिछड़े और दलित समाज को अच्छी हिस्सेदारी देने की कोशिश की है। साथ ही अगड़े और पिछड़े वर्गों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन प्रतिनिधित्व के स्तर पर असंतुलन की चर्चा हो रही है।

ब्राह्मणों को आबादी के अनुपात में कम प्रतिनिधित्व

प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 12 से 14 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, जबकि भूमिहार और त्यागी समुदाय की आबादी करीब एक प्रतिशत है। इसके बावजूद 48 सदस्यीय नई टीम में चार भूमिहार नेताओं को स्थान मिला है, जबकि ब्राह्मण समाज को उनकी आबादी के अनुपात में कम प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही जा रही है।

काम के आधार पर मिली जिम्मेदारी

2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक बनीं प्रयागराज की पूजा पाल को भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं, भाजपा के हिंदुत्ववादी चेहरे और पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को भी लंबे समय बाद प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर संगठन की मुख्यधारा में वापसी कराई गई है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में किए गए उनके संगठनात्मक कार्य को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महिलाओं को नहीं मिली 33 प्रतिशत हिस्सेदारी

भाजपा महिलाओं को संगठन में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की बात करती रही है, लेकिन नई प्रदेश टीम में यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। 48 सदस्यीय कार्यकारिणी में केवल 12 महिलाओं को ही स्थान मिला है, जबकि 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के हिसाब से यह संख्या 16 होनी चाहिए थी।

लखनऊ और बाराबंकी को मिला अधिक प्रतिनिधित्व

नई टीम में लखनऊ और बाराबंकी जैसे जिलों को अपेक्षाकृत ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है। कुछ जिलों से एक से अधिक पदाधिकारी बनाए गए हैं, जबकि कई जिले प्रतिनिधित्व से वंचित रह गए।

बाराबंकी से प्रियंका रावत को प्रदेश उपाध्यक्ष, उपेंद्र रावत को प्रदेश महामंत्री और अवधेश श्रीवास्तव को प्रदेश मंत्री बनाया गया है। खास बात यह है कि प्रियंका रावत और उपेंद्र रावत एक ही रावत (पासी) समुदाय से आते हैं। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि पदाधिकारियों के चयन में संतुलन के साथ-साथ प्रभावशाली नेताओं के बीच समन्वय और समझौते की भी अहम भूमिका रही।

उपेंद्र रावत की नियुक्ति पर भी चर्चा

पूर्व सांसद उपेंद्र रावत को प्रदेश महामंत्री बनाए जाने को भी चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले एक महिला के साथ कथित विवादित वीडियो वायरल होने के बाद उनका टिकट काट दिया गया था। हालांकि, फोरेंसिक जांच में वीडियो में उनकी आवाज की पुष्टि नहीं हो सकी थी। अब उन्हें प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने एक बार फिर संगठन में अहम भूमिका सौंपी है।


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