Tuesday, June 16, 2026 09:32:20 PM

राम मंदिर चढ़ावा गबन एसआईटी जांच पर सवाल
श्रीराम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: ट्रस्ट पदाधिकारियों पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच को लेकर बढ़ी चिंता

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों रुपये और जेवरात की कथित हेराफेरी की जांच एसआईटी कर रही है।

श्रीराम मंदिर चढ़ावा गबन मामला ट्रस्ट पदाधिकारियों पर उठे सवाल निष्पक्ष जांच को लेकर बढ़ी चिंता
राम मंदिर चढ़ावा गबन एसआईटी जांच पर सवाल |

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि और जेवरात में कथित गबन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। कुछ पर सीधे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि कई की भूमिका और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन पदाधिकारियों की निगरानी में यह पूरा तंत्र संचालित हो रहा था, क्या उनके रहते विशेष जांच दल (SIT) निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर पाएगा।

ट्रस्ट की जिम्मेदारियों पर उठे सवाल

मंदिर की व्यवस्थाओं से लेकर चढ़ावे की राशि की गिनती तक की जिम्मेदारी ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर होती है। इनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके बावजूद करोड़ों रुपये के कथित गबन का सामने आना व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

घटना के सार्वजनिक होने के बाद से ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। अब तक किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि जांच एजेंसियों के लिए प्रभावशाली पदाधिकारियों से पूछताछ करना आसान नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर 200 करोड़ रुपये तक के गबन की चर्चा

मामले में अब तक पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये की बरामदगी हो चुकी है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि बड़ी रकम पहले ही अन्य स्थानों पर खपाई जा चुकी है।

शुरुआत में गबन की राशि आठ करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर यह आंकड़ा सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ दावों में दो सौ करोड़ रुपये तक के गबन की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आंकड़ों की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति एसआईटी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

जेवरात और सोने की गदा गायब होने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, नकदी के अलावा चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात भी कथित रूप से गायब किए गए हैं। बताया जा रहा है कि इसमें करोड़ों रुपये मूल्य का कीमती सामान शामिल हो सकता है।

इसके अलावा दो किलो वजनी सोने की गदा के भी गायब होने की चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस पर टिप्पणी की है।

जमीन खरीद मामले पर भी उठे सवाल

मामले से जुड़े आरोपों में मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद प्रक्रिया भी चर्चा में है। आरोप लगाया गया है कि 2.92 करोड़ रुपये मूल्य की नजूल भूमि को 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया।

जानकारी के अनुसार, यह जमीन महंत मुरलीधर दास द्वारा बेची गई थी, जबकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय खरीदार पक्ष से जुड़े थे। मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट को भंग करने की मांग भी उठाई गई है।

चढ़ावे की चोरी को बताया गया अक्षम्य अपराध

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि श्रीराम जन्मभूमि के चढ़ावे में चोरी अक्षम्य अपराध है और इसके दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह भी कहा गया कि मंदिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। राज्य सरकार द्वारा विशेष जांच दल का गठन किया जा चुका है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि चढ़ावे की राशि की गिनती के लिए कर्मचारियों को एक कंपनी के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर रखा गया था। आरोप है कि जिन कर्मचारियों का चयन ट्रस्ट की ओर से किया गया, उन्हीं लोगों को आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्त किया गया।

बताया जा रहा है कि इनमें कई कर्मचारी ट्रस्ट पदाधिकारियों के रिश्तेदार या परिचित थे। यही नहीं, कर्मचारियों के सत्यापन, निगरानी और नियमित जांच जैसी प्रक्रियाओं में भी गंभीर लापरवाही बरती गई।

बैंक और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सूत्रों का कहना है कि चढ़ावे की राशि की गिनती प्रक्रिया में बैंक की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। ऐसे में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चोरी कैसे हुई?

मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात रहते हैं। इसके बावजूद ट्रस्ट कर्मचारी पहचान पत्र के आधार पर परिसर में कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र थे। सूत्रों के अनुसार, उनकी नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी।

बताया जा रहा है कि टिन्नू और अन्य लोगों ने ऐसे 50 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति कर रखी थी, जिससे निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कम वेतन में लंबे समय तक काम करने वालों पर संदेह

अब तक जिन लोगों के पास से रकम बरामद हुई है, वे सभी 12 हजार से 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्यरत थे। ये कर्मचारी दिन-रात मंदिर परिसर में ही रहते थे। जांच के दौरान अब इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने कम वेतन में लंबे समय तक काम करने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।

बेहिसाब चढ़ावे से गबन का सही आंकड़ा निकालना मुश्किल

जानकारों का कहना है कि गबन की वास्तविक राशि का अनुमान लगाना आसान नहीं है। दरअसल, दानपात्रों से निकाली गई राशि की गिनती होने तक उसका कोई आधिकारिक हिसाब मौजूद नहीं होता था।

सभी दानपात्रों की रकम को एक जगह इकट्ठा कर गिनती की जाती थी। आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान रकम में हेरफेर की जाती रही और बाद में जो आंकड़ा दर्ज किया गया, वही आधिकारिक रिकॉर्ड बन गया। यही कारण है कि गबन की कुल राशि का सही-सही निर्धारण करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

कुंभ और माघ मेले में बढ़े चढ़ावे का उठाया गया फायदा

सूत्रों के मुताबिक, पिछले वर्ष आयोजित कुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे। उस समय मंदिर में चढ़ावे की राशि में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी।

आरोप है कि इसी अवधि में चढ़ावे की अधिकता का फायदा उठाकर प्रतिदिन 10 से 15 लाख रुपये तक की रकम कथित रूप से पार की गई। इसी तरह माघ मेले के दौरान भी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच गिनती प्रक्रिया में अनियमितताएं होने की बात सामने आ रही है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही गबन की वास्तविक राशि, जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका और आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।


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