Tuesday, June 16, 2026 08:29:51 PM

दोनों हाथ गंवाने के बाद पैरों से दी परीक्षा
दोनों हाथ गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, पैरों से लिखकर मंजू ने दी बीए की परीक्षा

संभल की मंजू ने दोनों हाथ खोने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। पैरों से लिखकर बीए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा दी और अपने जज्बे, संघर्ष व आत्मविश्वास से सभी को प्रेरित किया।

दोनों हाथ गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला पैरों से लिखकर मंजू ने दी बीए की परीक्षा
दोनों हाथ गंवाने के बाद पैरों से दी परीक्षा |

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक बेटी ने अपने हौसले और जज्बे से यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। गांव चिमियावली की रहने वाली मंजू ने दोनों हाथ खोने के बावजूद हार नहीं मानी और पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। सोमवार को उन्होंने बीए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा देकर सभी के लिए प्रेरणा का उदाहरण पेश किया।

परीक्षा केंद्र में सभी की नजरें मंजू पर टिकीं

संभल के एमजीएम कॉलेज में इन दिनों गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद की योजना के तहत परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। सोमवार को बीए दूसरे सेमेस्टर की भूगोल विषय की परीक्षा के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

परीक्षा कक्ष में अन्य छात्रों की तरह बैठीं मंजू हाथों की बजाय अपने पैरों से उत्तर पुस्तिका में जवाब लिख रही थीं। उनकी लगन और आत्मविश्वास को देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए।

पैरों की उंगलियों में कलम पकड़कर लिखे जवाब

मंजू ने अपनी कलम पैरों की उंगलियों में फंसाकर पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रश्नों के उत्तर लिखे। उनकी लिखने की गति और एकाग्रता देखकर हर कोई हैरान था।

सबके मन में उठ रहे सवालों का जवाब मंजू का संघर्ष और उनका आत्मविश्वास दे रहा था। उन्होंने निर्धारित समय के भीतर अपनी परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी की।

छह साल पहले हादसे में गंवा दिए थे दोनों हाथ

करीब छह साल पहले एक दर्दनाक हादसे में मंजू के दोनों हाथ चले गए थे। पशुओं का चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आने से उन्होंने अपने दोनों हाथ खो दिए थे।

इस घटना के बाद उनके भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हुए, लेकिन मंजू ने हिम्मत नहीं हारी और अपने जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया।

छठी कक्षा से शुरू किया नया संघर्ष

मंजू ने बताया कि हादसे के समय वह छठी कक्षा में पढ़ती थीं। हाथ खोने के बाद उन्होंने अपने पैरों को हाथों की तरह इस्तेमाल करने का अभ्यास शुरू किया।

धीरे-धीरे उन्होंने पैरों से लिखना सीखा और पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपनी शिक्षा नहीं छोड़ी।

अब स्नातक की डिग्री की ओर बढ़ रहीं मंजू

लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर मंजू एक-एक कक्षा पास करती हुई अब स्नातक की पढ़ाई तक पहुंच चुकी हैं।

अपने भविष्य को लेकर उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि यदि जीवन में सफल होने का संकल्प मजबूत हो, तो हर चुनौती छोटी पड़ जाती है। उनका मानना है कि कॉलेज की परीक्षा हो या जीवन की कोई भी परीक्षा, दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।

मंजू की यह कहानी न सिर्फ शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे इंसान को आगे बढ़ने का रास्ता दिखा ही देते हैं।


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