Tuesday, June 16, 2026 08:13:05 PM

एनसीपीआई को मिला नया अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश
एनसीपीआई को मिला नया अध्यक्ष, ज्योतिप्रकाश चटर्जी के नाम पर लगी मुहर

एनसीपीआई ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। संस्थापक शिवली कुंडू के इस्तीफे के बाद यह फैसला लिया गया। नए अध्यक्ष की पहचान और पार्टी के भीतर संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एनसीपीआई को मिला नया अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी के नाम पर लगी मुहर
एनसीपीआई को मिला नया अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश |

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट से जुड़ी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बताया है कि नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला उस समय सामने आया है जब पार्टी की संस्थापक शिवली कुंडू ने एक दिन पहले अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

अध्यक्ष पद को लेकर अटकलों पर लगा विराम

शिवली कुंडू के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि काकोली घोष दस्तीदार खुद पार्टी की कमान संभाल सकती हैं। हालांकि, मंगलवार को पीटीआई से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के नए अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी ही हैं और उन्हें ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नए अध्यक्ष की पहचान को लेकर सवाल

दिलचस्प बात यह है कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते।

खुद को एनसीपीआई का राष्ट्रीय संगठन महासचिव बताने वाले शांतनु डे ने कहा कि उन्हें नए अध्यक्ष के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि पार्टी के भीतर क्या चल रहा है। डे के मुताबिक, उन्होंने पार्टी के लिए लंबे समय तक काम किया है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों को लेकर उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े नेताओं के पार्टी में आने से उन्हें खुशी है, लेकिन संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को जानकारी न देना निराशाजनक है। पुराने पार्टी पोस्टरों में भी शांतनु डे का नाम महासचिव के रूप में दर्ज है।

क्या है नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया?

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया अपेक्षाकृत नई राजनीतिक पार्टी है। इसका पंजीकरण जनवरी 2023 में चुनाव आयोग के साथ हुआ था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी का पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल क्षेत्र में दर्ज है।

त्रिपुरा चुनाव में रहा कमजोर प्रदर्शन

एनसीपीआई ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारे थे। उस समय पार्टी ने "राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें" का नारा दिया था।

चुनाव में पार्टी के दो उम्मीदवारों ने उसके चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा, एक उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरा और एक उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था।

हालांकि, चुनावी नतीजों में पार्टी को खास सफलता नहीं मिली। पार्टी उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा को 536 वोट मिले, जो नोटा से केवल 36 वोट अधिक थे। दूसरे उम्मीदवार को 286 वोट मिले, जबकि पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को 376 वोट प्राप्त हुए।

आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं

चुनाव आयोग को सौंपी गई 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी को शुभचिंतकों से कुल 1,13,075 रुपये का चंदा मिला था। इसमें से लगभग पूरी राशि खर्च हो गई और वित्तीय वर्ष के अंत में पार्टी के पास केवल 75 रुपये नकद बचे थे।

क्यों अहम माना जा रहा है यह मामला?

टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों के गुट के एनसीपीआई से जुड़ने के बाद यह छोटी और कम चर्चित पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।

हालांकि, पार्टी के नए अध्यक्ष की पहचान, संगठन के भीतर संवाद की कमी और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल अब भी बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनसीपीआई खुद को एक प्रभावशाली राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर पाती है या नहीं।


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