यूपी पंचायत पुराने प्रधान प्रशासक रोक हाईकोर्ट |
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में प्रशासन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है, जिससे पूरे राज्य में हलचल मच गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें कार्यकाल खत्म हो चुकी ग्राम पंचायतों में पुराने ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक करार देते हुए कड़ी टिप्पणी की है।
क्या है पूरा मामला?
25 मई को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया था। इसके तहत जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और नई पंचायतें अभी तक गठित नहीं हुई थीं, वहां प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी पुराने ग्राम प्रधानों को ही सौंप दी गई थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए अरविंद राठौर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह निर्णय नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है, क्योंकि कार्यकाल खत्म होने के बाद किसी जनप्रतिनिधि को प्रशासक बनाना सही नहीं है।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने दलील दी कि यह आदेश पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जब किसी जनप्रतिनिधि का कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तो उसे फिर से प्रशासनिक शक्ति देना लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करता है और इससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
दोनों पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 25 मई के आदेश पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक मामले की अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक पुराने ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम नहीं कर सकेंगे।
आगे क्या होगा?
इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की गई है। इस फैसले के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजरें आने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले पर अंतिम निर्णय आ सकता है।