चंपत राय राम मंदिर चढ़ावा विवाद इस्तीफा |
"अयोध्या सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सबसे लंबी सामाजिक, धार्मिक और कानूनी लड़ाइयों में से एक का केंद्र रही है। इस आंदोलन के कई चेहरे रहे, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो हमेशा पर्दे के पीछे रहकर भी सबसे अहम भूमिका निभाते रहे। उन्हीं में से एक हैं चंपत राय।"
करीब चार दशक तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संगठनात्मक ढांचे में काम करने वाले चंपत राय को राम मंदिर आंदोलन का रणनीतिकार माना जाता रहा है। लेकिन अब वही चंपत राय एक अलग वजह से सुर्खियों में हैं।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में एफआईआर दर्ज होने और एसआईटी की जांच के बाद चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया।
हालांकि, इस मामले में दर्ज एफआईआर में चंपत राय या डॉ. अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर की गई है और फिलहाल आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय का जन्म वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना में हुआ था। उनके पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल था।
उन्होंने भौतिकी (फिजिक्स) की पढ़ाई की और बाद में बिजनौर के धामपुर स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज में भौतिकी के प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। हालांकि, कुछ वर्षों बाद उन्होंने शिक्षण छोड़कर अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
आरएसएस में वे प्रचारक बने और लंबे समय तक उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में संगठन विस्तार का काम किया। बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और वे संगठन के केंद्रीय नेतृत्व का हिस्सा बने।
राम मंदिर आंदोलन में क्या रही भूमिका?
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाने लगे। आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों के समन्वय, साधु-संतों से संवाद, कानूनी और संगठनात्मक तैयारियों में उन्होंने लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा के बाद 19 फरवरी 2020 को चंपत राय को ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण, दान प्रबंधन, ट्रस्ट की बैठकों और निर्माण संबंधी आधिकारिक जानकारी देने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के पास रही।
राम मंदिर निर्माण के दौरान मीडिया के सामने ट्रस्ट का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में भी चंपत राय सबसे आगे रहे।
आखिर विवाद कैसे शुरू हुआ?
जून 2026 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि में गड़बड़ी हुई है। इसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इस एसआईटी में आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत, आईपीएस अधिकारी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया।
23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई।
एफआईआर में किन लोगों के नाम हैं?
ट्रस्ट के सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि कोतवाली में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इनमें रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ल, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।
इनमें अधिकांश आरोपी दानपात्रों की निगरानी, चढ़ावे की राशि को गणना कक्ष तक पहुंचाने और नकदी की गिनती से जुड़े कार्यों में तैनात थे।
गिरफ्तार आरोपियों में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा, क्योंकि वह चंपत राय के ड्राइवर बताए जाते हैं।
चंपत राय पर क्या आरोप लगे?
एफआईआर में चंपत राय का नाम नहीं है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ट्रस्ट के महासचिव होने के नाते नैतिक जिम्मेदारी का सवाल उठाया। आलोचना इसलिए भी तेज हुई क्योंकि मुख्य आरोपियों में उनके ड्राइवर का नाम सामने आया।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मंदिर की धनराशि का दुरुपयोग हुआ। वहीं भाजपा के पूर्व सांसद विनय कटियार ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संतोष दुबे ने भी मंदिर की कुछ बहुमूल्य धातु की ईंटों के गायब होने का आरोप लगाते हुए पुलिस शिकायत दर्ज कराई और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच की मांग की है। इन आरोपों की जांच जारी है और इन पर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
फिर इस्तीफा क्यों?
एफआईआर दर्ज होने के एक दिन बाद चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा सौंप दिया। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है। उनके साथ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा दिया।
हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस्तीफे को लेकर अंतिम निर्णय या आगे की प्रक्रिया पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब आगे क्या?
इस पूरे मामले की जांच एसआईटी की रिपोर्ट और पुलिस की जांच के आधार पर आगे बढ़ रही है। सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है।
दूसरी ओर, चंपत राय का इस्तीफा इस मामले को और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक महत्व दे रहा है। आने वाले दिनों में जांच की अगली रिपोर्ट, अदालत की कार्यवाही और ट्रस्ट के फैसले इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।