एनसीआर में गैंग अपराधों की बढ़ती चिंता |
राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर में गैंगस्टरों द्वारा रंगदारी, लूट और हत्या जैसी वारदातों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। ऐसे हालात में हरियाणा के पूर्व सीआईडी चीफ एवं सेवानिवृत्त एडीजीपी रेशम सिंह ने एनसीआर से जुड़े सभी राज्यों की पुलिस को एकजुट होकर साझा रणनीति के तहत अभियान चलाने की जरूरत बताई है।
जागरण विमर्श कार्यक्रम के दौरान रेशम सिंह ने कहा कि गैंगस्टरों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत एनसीआर के सभी राज्यों की पुलिस को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए एक अलग विशेष टीम बनाई जा सकती है, जिसकी कमान किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि तय लक्ष्य के साथ गैंगस्टरों के साथ-साथ उन्हें शरण देने और आर्थिक मदद पहुंचाने वालों तक भी कानून का शिकंजा पहुंच सके।
त्वरित न्याय से ही टूटेंगे गैंग
रेशम सिंह ने कहा कि पुलिस, अभियोजन और न्यायिक व्यवस्था की संयुक्त भूमिका बेहद अहम है। यदि ऐसे मामलों में अदालतों से जल्द फैसले आएंगे, तो गैंगस्टर गिरोहों की कमर तोड़ी जा सकेगी और व्यापारियों, कारोबारियों व उद्यमियों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा।
उन्होंने हाल ही में गुरुग्राम में रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी के घर हुई फायरिंग और पुलिस मुठभेड़ में चार शूटरों के मारे जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके बाद भी दिल्ली में रंगदारी मांगने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे साफ है कि अपराधियों में कानून का डर पैदा करना बेहद जरूरी है।
विदेश से चल रहे गैंग भी बड़ी चुनौती
रेशम सिंह ने कहा कि कई गैंगस्टर विदेश में बैठकर अपने गिरोहों का संचालन कर रहे हैं और भारत ही नहीं, दूसरे देशों में भी अपराध करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए सीआईडी, रॉ, आईबी और अन्य केंद्रीय व राज्य सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ लगातार काम कर रही हैं और पहले भी कई बड़े गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
आधुनिक प्रशिक्षण और मजबूत खुफिया तंत्र की जरूरत
पूर्व एडीजीपी का मानना है कि पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स और विशेष जांच एजेंसियों को अपने खुफिया नेटवर्क को और मजबूत करना होगा। साथ ही समय-समय पर आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि अत्याधुनिक हथियारों से लैस अपराधियों का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सके।
उन्होंने विश्वास जताया कि गुरुग्राम की तरह एनसीआर के अन्य शहरों की पुलिस भी सक्रिय गैंगों की कमर तोड़ने की दिशा में काम कर रही होगी।
फंडिंग रोकना और सोशल मीडिया पर नजर जरूरी
रेशम सिंह ने कहा कि एनसीआर में सक्रिय कई गैंग बेरोजगार और कम पढ़े-लिखे युवाओं को पैसों का लालच देकर अपने गिरोह में शामिल करते हैं। इसलिए पुलिस को इन गैंगों की फंडिंग के स्रोत पूरी तरह बंद करने, सोशल मीडिया और इंटरनेट गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने तथा पकड़े गए अपराधियों से उनके नेटवर्क और फंडिंग करने वालों की जानकारी जुटाकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
पूर्व ADGP ने दिए अहम सुझाव
- रंगदारी, लूट और हत्या करने वाले गिरोहों पर त्वरित कार्रवाई हो।
- गैंगस्टरों को शरण देने और आर्थिक मदद करने वालों को भी कानून के दायरे में लाया जाए।
- गैंगों का अनावश्यक प्रचार-प्रसार किसी भी माध्यम से न हो।
- बेरोजगार युवाओं को लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेलने से रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए।
- संयुक्त अभियान के लिए अलग विशेष टीम बनाई जाए, जिससे कार्रवाई गोपनीय और अधिक प्रभावी हो सके।
- यदि जेल से गिरोह संचालित हो रहे हैं, तो इसकी गहराई से जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
पूर्व एडीजीपी का मानना है कि एनसीआर में संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है, जब सभी एजेंसियां मिलकर समन्वित और लगातार कार्रवाई करें।