अंकित शर्मा हत्या फैसला |
करीब साढ़े छह साल पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान मारे गए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, दंगा, अपहरण और दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर अपराधों का दोषी करार दिया है। हालांकि, अदालत ने ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) के आरोप से बरी कर दिया।
एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंसक भीड़ का हिस्सा बनता है, तो वह उस भीड़ द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए भी बराबर का जिम्मेदार होता है।
घर से निकले अंकित, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आए
अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के मुताबिक, 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान अंकित घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले से बरामद हुआ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उनके शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों से किए गए 51 घाव थे। अदालत ने यह भी माना कि उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरे और शरीर पर एसिड डाला गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिस इमारत में ताहिर हुसैन मौजूद थे, वह हिंसक भीड़ के संचालन का केंद्र बन गई थी। उल्लेखनीय है कि 2020 के दिल्ली दंगों में 53 लोगों की जान गई थी।
दिल्ली पुलिस ने कहा- निष्पक्ष जांच पर लगी न्यायिक मुहर
फैसले के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने कहा कि दंगों के समय पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित और पेशेवर जांच करना था। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला जांच टीम की मेहनत और पेशेवर तरीके से की गई जांच पर न्यायिक मुहर है।
वहीं, स्पेशल सीपी (क्राइम) एचजीएस धालीवाल ने कहा कि क्राइम ब्रांच की गहन और साक्ष्य-आधारित जांच के चलते आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस अदालत में पेश किया जा सका।
बचाव पक्ष हाई कोर्ट जाएगा
ताहिर हुसैन की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता तारा नरूला ने कहा कि बचाव पक्ष ने पूरे मुकदमे के दौरान मजबूती से अपना पक्ष रखा और अभियोजन पक्ष के कई गवाहों की गवाही को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि छह आरोपियों का बरी होना यह दर्शाता है कि अदालत ने सभी सबूतों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया है। हालांकि, ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के फैसले को अब हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
'ऐसे मामलों में कोई नहीं जीतता'
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे ने कहा कि इस फैसले को किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, एक परिवार ने अपना बेटा खोया है, जबकि दोषी ठहराए गए लोगों के परिवार भी कठिन दौर से गुजरेंगे। सांप्रदायिक हिंसा का सबसे बड़ा नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ता है और अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम होता है।
11 में से 5 दोषी, 6 आरोपी बरी
इस मामले में कुल 11 आरोपी थे। अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को दोषी ठहराया। वहीं हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, समीर खान, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी और मुंतजिम उर्फ मूसा को मुख्य आरोपों से सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। इस मामले में मार्च 2023 में सभी 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की नजर अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।