शिवसेना यूबीटी सांसदों की गैरमौजूदगी पर सवाल |
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 5 सांसद उद्धव ठाकरे द्वारा उनके आवास 'मातोश्री' पर बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। इसके बाद पार्टी में संभावित टूट और सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर शामिल हैं। इन सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
UBT का दावा- सांसद ऑनलाइन जुड़े थे
बैठक के बाद शिवसेना (UBT) की ओर से कहा गया कि अनुपस्थित पांचों सांसद वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए थे। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे की सीधे तौर पर केवल नागेश पाटिल अष्टिकर से ही बातचीत हो सकी थी।
इसी बीच यह मामला और चर्चा में तब आ गया जब बैठक में शामिल न होने वाले सांसद संजय देशमुख ने नई दिल्ली में एकनाथ शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव से मुलाकात की।
उद्धव ठाकरे ने दिया दो दिन का अल्टीमेटम
पार्टी में संभावित टूट और विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे कथित 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बैठक में अनुपस्थित रहे पांचों सांसदों को अगले दो दिनों के भीतर मातोश्री पहुंचकर आमने-सामने चर्चा करने के लिए बुलाया है।
दिल्ली में प्रताप जाधव से मिले संजय देशमुख
यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख रविवार को मातोश्री में आयोजित बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए थे। इसके अगले ही दिन उन्होंने नई दिल्ली में शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव से मुलाकात की।
इस मुलाकात के बाद उन अटकलों को और बल मिला कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
क्या बोले संजय देशमुख और प्रताप जाधव?
इन चर्चाओं के बीच प्रताप जाधव ने स्पष्ट किया कि उनकी और संजय देशमुख की पुरानी दोस्ती है। उन्होंने बताया कि दोनों पहले एक ही संगठन में साथ काम कर चुके हैं। उस समय देशमुख यवतमाल के जिला प्रमुख थे, जबकि वह बुलढाणा के जिला प्रमुख थे।
प्रताप जाधव ने कहा कि दोनों पड़ोसी लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और अक्सर मिलते रहते हैं। उनके अनुसार, संजय देशमुख अपने शिक्षण संस्थान से जुड़े कुछ काम के सिलसिले में जानकारी लेने आए थे और इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुलाकात का किसी राजनीतिक बदलाव या पार्टी छोड़ने की अटकलों से कोई संबंध नहीं है।
मुंबई नहीं पहुंचे, लेकिन अगले दिन दिल्ली में दिखे
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि संजय देशमुख रविवार को मुंबई में पार्टी बैठक में शामिल नहीं हो सके, लेकिन अगले ही दिन नई दिल्ली पहुंचकर शिंदे गुट के मंत्री से मुलाकात की।
इसी वजह से राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
संजय राउत बोले- सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के सभी 9 सांसद संपर्क में हैं और पूरी मजबूती के साथ उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी अपने विरोधियों के खिलाफ 'ऑपरेशन वुल्फ' शुरू करेगी। माना जा रहा है कि उनका इशारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर था।
बैठक में कौन-कौन पहुंचे?
रविवार को मातोश्री में हुई बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे।
वहीं संजय राउत के अनुसार, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे, जबकि संजय जाधव ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बात की थी।
राउत ने यह भी कहा कि संजय जाधव अगले दो दिनों में मुंबई पहुंचकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे।
दल-बदल की चर्चा क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शिवसेना (UBT) के पास फिलहाल 9 लोकसभा सांसद हैं। किसी भी दल के विलय या टूट की स्थिति में अयोग्यता से बचने के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम 6 सांसदों का एक साथ होना जरूरी होता है।
इसी वजह से पांच सांसदों की गैरमौजूदगी और उनकी गतिविधियों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि फिलहाल पार्टी नेतृत्व का दावा है कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ हैं और पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं होने जा रही है।