भारत अमेरिका समझौते पर राकेश टिकैत की चेतावनी |
नोएडा। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (इंडो-यूएस डील) को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने केंद्र सरकार को कड़ा संदेश दिया। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर कहा कि किसी भी स्थिति में किसानों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। इस पत्र की जानकारी भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने मीडिया के साथ साझा की।
21 जून को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि यदि प्रस्तावित व्यापार समझौते से किसानों के हित प्रभावित हुए तो किसान आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों किसानों की आजीविका और कृषि व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी फैसले का भाकियू विरोध करेगी।
प्रेस वार्ता में युद्धवीर सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों में अमेरिका का दबाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि 140 करोड़ आबादी वाले भारत को 40 करोड़ आबादी वाले देश के दबाव में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
भाकियू ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि फरवरी 2025 से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीयर की 23-24 जून को नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस समझौते पर अंतिम सहमति बनने की संभावना जताई गई थी।
संगठन ने आशंका व्यक्त की कि समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया जा सकता है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। भाकियू ने यह भी कहा कि यदि अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोला गया तो देश के किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी। इसके अलावा, आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) मक्का के अप्रत्यक्ष प्रवेश की संभावना को भी संगठन ने गंभीर चिंता का विषय बताया।
पत्र में यह भी कहा गया कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अमेरिका भारत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था में बदलाव का दबाव बना रहा है। भाकियू के अनुसार, यदि यह मुद्दा व्यापार समझौते का हिस्सा बना तो इसका सीधा असर धान और गेहूं उत्पादक किसानों पर पड़ेगा।
संगठन ने अपने पत्र में कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता की मजबूत कड़ी भी हैं। इसलिए उन्हें असमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
भाकियू ने प्रधानमंत्री से मांग की कि व्यापार वार्ताओं के दौरान किसानों, डेयरी, मत्स्य पालन और पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी समझौता किया गया तो देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।