नोएडा। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार और प्रख्यात मूर्तिकार राम सुतार का लंबी बीमारी के बाद नोएडा के सेक्टर-19 स्थित आवास पर निधन हो गया। 100 वर्षीय राम सुतार के निधन से देश और दुनिया के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री सहित कई बड़ी हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
राम सुतार को उनके अद्वितीय योगदान के लिए पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा जा चुका था। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र अनिल सुतार ने दी, जो स्वयं एक प्रतिष्ठित मूर्तिकार हैं और अपने पिता की कला विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
गांधी से लेकर अंबेडकर तक, सैकड़ों ऐतिहासिक कृतियां
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अलावा राम सुतार ने देश और विदेश में स्थापित महात्मा गांधी की 350 से अधिक मूर्तियों का निर्माण किया। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर, छत्रपति संभाजी महाराज सहित कई महान विभूतियों की प्रतिमाएं गढ़ीं। पुणे में स्थापित 100 फीट ऊंची छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल है।
महाराष्ट्र भूषण से हुए थे सम्मानित
बीते नवंबर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ नोएडा पहुंचे थे और राम सुतार को उनके आवास पर महाराष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘महाराष्ट्र भूषण’ प्रदान किया था।
साधारण परिवार से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर
19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के गोंडूर गांव में एक गरीब परिवार में जन्मे राम सुतार ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने नोएडा में अपना स्टूडियो स्थापित किया और वर्ष 1990 से यहीं रह रहे थे। अजंता-एलोरा की गुफाओं में प्राचीन मूर्तियों के जीर्णोद्धार में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
संसद भवन से अयोध्या तक अमिट छाप
राम सुतार द्वारा निर्मित संसद भवन में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा, प्रस्तावित 251 मीटर ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा और अयोध्या के लता मंगेशकर चौक पर लगी वीणा उनकी कालजयी कृतियों में शामिल हैं। राम सुतार का निधन भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी कृतियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी।