नोएडा। शहर और जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से नोएडा पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने थानों के नेतृत्व में बदलाव करते हुए कुल 9 थाना प्रभारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। यह निर्णय पुलिस कमिश्नरेट स्तर पर गठित पुलिस स्थापना बोर्ड की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया, जिसके तुरंत बाद नई तैनातियों की आधिकारिक सूची जारी कर दी गई।
पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, यह फेरबदल मौजूदा अपराध स्थिति की समीक्षा, फील्ड स्तर पर पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने तथा आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। खासतौर पर कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों में नए प्रभारी निरीक्षकों की तैनाती की गई है, ताकि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभाला जा सके।
नई तैनातियां इस प्रकार हैं—
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निरीक्षक अरविंद कुमार को थाना सेक्टर-20 का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है।
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निरीक्षक धर्मप्रकाश शुक्ला को थाना सेक्टर-39 की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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आईटी सेल (सेंट्रल) में तैनात निरीक्षक अमित तोमर को अब थाना सेक्टर-58 का प्रभारी निरीक्षक नियुक्त किया गया है।
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निरीक्षक अवधेश प्रताप सिंह को थाना फेस-2 में कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक के रूप में तैनात किया गया है।
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निरीक्षक अमित कुमार को थाना सेक्टर-63 की कमान दी गई है।
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ग्रामीण क्षेत्र में निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह को दादरी थाना का नया प्रभारी बनाया गया है।
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वेलफेयर शाखा में तैनात श्याम बाबू शुक्ला को रबूपुरा थाना का प्रभारी निरीक्षक नियुक्त किया गया है।
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निरीक्षक विंध्याचल तिवारी को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है।
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निरीक्षक नीरज कुमार मिश्रा को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव बेहद अहम है। नए थाना प्रभारियों के सामने अपराध नियंत्रण, गश्त व्यवस्था को मजबूत करने, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और पब्लिक डीलिंग को बेहतर बनाने की बड़ी चुनौती होगी। विशेष रूप से शहरी नोएडा में बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव और साइबर अपराध जैसी चुनौतियों को देखते हुए थाना स्तर पर मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
नोएडा पुलिस कमिश्नरेट का स्पष्ट कहना है कि यह प्रशासनिक फेरबदल केवल पदों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद फील्ड में ठोस और सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में नए प्रभारियों के प्रदर्शन के आधार पर अपराध दर, पुलिस की रिस्पॉन्स टाइम और जनता की संतुष्टि जैसे मानकों पर इसका असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।