Sunday, February 08, 2026 11:02:31 AM

नोएडा में फर्जी लोन घोटाला
100 करोड़ की फर्जी लोन ठगी का नेटवर्क ध्वस्त, 8 आरोपी गिरफ्तार

नोएडा की एसटीएफ ने 100 करोड़ रुपये के फर्जी लोन घोटाले का पर्दाफाश किया, 10 बैंकों को लक्षित करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

100 करोड़ की फर्जी लोन ठगी का नेटवर्क ध्वस्त 8 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस हिरासत में सभी आरोपी | पाठकराज
पाठकराज

नोएडा। स्पेशल टास्क फोर्स की नोएडा युनिट ने 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लोन घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग फर्जी दस्तावेज तैयार कर देश के विभिन्न बैंकों से लोन हासिल करता था और बिल्डर्स के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर प्रोफाइल फंडिंग कर रहा था।


 

10 बैंकों से 100 करोड़ की ठगी

एसटीएफ जांच में सामने आया कि गिरोह ने अब तक 10 से अधिक राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों को निशाना बनाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। ये लोग फर्जी आधार, नकली पैन, झूठे बैंक स्टेटमेंट और गलत प्रोफाइल बनाकर लोन मंजूर करवाते थे और तुरंत ही राशि को बिल्डर्स के जरिए रूट कर देते थे।


 

प्रोफाइल फंडिंग में दिल्ली–UP–उत्तराखंड के बिल्डर्स शामिल

एसटीएफ के अनुसार गिरोह बिल्डर्स के साथ मिलकर काम करता था, जो फर्जी आवेदकों के नाम पर लोन दिलवाकर पूरे रैकेट को फंडिंग और कागजी समर्थन प्रदान करते थे।
यह नेटवर्क दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, देहरादून और ऋषिकेश तक फैला हुआ था।


 

STF ने की भारी बरामदगी

छापेमारी में एसटीएफ को रैकेट से जुड़े कई अहम साक्ष्य मिले, जिनमें शामिल हैं—

  • 126 पासबुक

  • 170 डेबिट कार्ड

  • 45 आधार कार्ड

  • 27 पैन कार्ड

  • 26 मोबाइल फोन

  • 3 लैपटॉप

  • 3 लग्जरी गाड़ियां

ये सभी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस गिरोह द्वारा फर्जी प्रोफाइल तैयार करने और लोन ट्रांजैक्शन को ऑपरेट करने के लिए उपयोग किए जाते थे।


 

220 बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने की कार्रवाई शुरू

एसटीएफ ने रैकेट से जुड़े संदिग्ध लेन-देन वाले 220 बैंक खातों को फ्रीज़ करने के लिए संबंधित बैंकों से पत्राचार शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि इन खातों में बड़ी मात्रा में ठगी का पैसा घुमाया गया है। जांच में पता चला कि आरोपी इस तरह काम करते थे। बेरोजगार या जरूरतमंद लोगों के दस्तावेज खरीदते थे। उनकी फर्जी प्रोफाइल तैयार करते। बिल्डर्स के जरिए बैंक से लोन पास करवाते और लोन राशि तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते। कुछ महीनों तक इएमआई भरकर बैंक का संदेह मिटाते फिर प्रोफाइल और नंबर गायब कर देते थे।


 

एसटीएफ की आगे की कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस रैकेट के अन्य सहयोगियों, एजेंटों और बिल्डर्स की भूमिका की जांच कर रही है। इस नेटवर्क से जुड़े कई और बैंक अधिकारियों व बिचौलियों की भी पहचान की जा रही है।


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