Monday, March 09, 2026 09:34:43 PM

नोएडा में बंगाली शरदोत्सव की धूम
ग्रामीण बंगाल के रंग में रंगेगा नोएडा सेक्टर-50, सप्तऋषि संघ का 21वां शरदोत्सव बनेगा आकर्षण

नोएडा के सप्तऋषि संघ द्वारा आयोजित 21वां शरदोत्सव बंगाल की ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन होगा।

ग्रामीण बंगाल के रंग में रंगेगा नोएडा सेक्टर-50 सप्तऋषि संघ का 21वां शरदोत्सव बनेगा आकर्षण
मूर्ती को ग्रामीण रंग में तैयार करता मूर्तिकार | पाठकराज
पाठकराज

नोएडा। इस बार नोएडा सेक्टर-50 का सामुदायिक केंद्र बंगाल की संस्कृति और ग्रामीण सौंदर्य से सराबोर होगा। सप्तऋषि संघ का 21वां शरदोत्सव शनिवार से आरंभ होकर पांच दिनों तक भक्तों और आगंतुकों को एक अनोखा अनुभव कराएगा। इस आयोजन की खासियत यह है कि दुर्गा पूजा को बंगाल के ग्रामीण परिवेश में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को गांव की परंपराओं और कलात्मकता का एहसास होगा।


 

ग्रामीण झलक से सजेगा पंडाल

पूजा पंडाल को पारंपरिक शैली में बांस और कपड़े से तैयार किया गया है। इसकी छत को पुआल की छप्पर से सजाया गया है, जो इसे गांव की झोपड़ियों जैसी सादगी और खूबसूरती देता है। मंदिर परिसर के अंदर प्रवेश करते ही आगंतुकों को सुंदर चित्रकारी, हरे-भरे वातावरण, नावों से गुजरते जलमार्ग और अनूठी बंगाली झोपड़ियों का नजारा देखने को मिलेगा। देवी दुर्गा की प्रतिमा इस बार खास आकर्षण का केंद्र होगी। इसे बंगाल की कालाघाट पट कला शैली में घास, लकड़ी और मिट्टी से निर्मित किया गया है। प्रतिमा का हर आभूषण और रंग लोककला की गहराई और परंपरा का जीवंत रूप प्रस्तुत करता है।


 

संस्कृति और कला का संगम

पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह सांस्कृतिक और कलात्मक उत्सव का रूप लेगी। प्रत्येक शाम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। एक विशेष समूह महिषासुर मर्दिनी के रूप में प्रतीकात्मक आगोमनी प्रस्तुत करेगा, जिससे देवी की विजय और शक्ति का संदेश मिलेगा। "तमसो मा ज्योतिर्गमय" विषय पर आधारित समूह नृत्य और गायन प्रतियोगिता भक्तों को मंत्रमुग्ध करेगी। सारेगामा का प्रसिद्ध जीतम राय संगीत बैंड अपनी प्रस्तुति से वातावरण को संगीतमय बना देगा।


 

कलाकारों का योगदान

पूरे आयोजन की कलात्मकता और सजावट का कार्य मोली सरकार, मधुरा और सोमनाथ दत्त ने ट्रस्ट के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर किया है। चित्रकला, झोपड़ी निर्माण और थीम डेकोरेशन में महीनों की मेहनत लगी है। आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूजा के साथ-साथ बंगाल की ग्रामीण परंपरा और कला से जोड़ना है।


 

भक्तों के लिए विशेष अनुभव

आयोजकों के मुताबिक, इस बार का शरदोत्सव भक्तों के लिए केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि ग्रामीण बंगाल की संस्कृति की यात्रा भी होगा। पूजा पंडाल से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक, हर पहलू में परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।


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