Thursday, July 02, 2026 07:19:04 PM

ई-रिक्शा बंद करने वाली BAT-BMS ऐप दावा
क्या चलते ई-रिक्शा को ऐप से बंद किया जा सकता है? BAT-BMS ऐप को लेकर बड़ा दावा, टेक एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

सोशल मीडिया पर BAT-BMS ऐप से चलते ई-रिक्शा को बंद करने का दावा किया जा रहा है। टेक एक्सपर्ट्स ने बिना पासवर्ड वाले BMS सिस्टम को सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।

क्या चलते ई-रिक्शा को ऐप से बंद किया जा सकता है bat-bms ऐप को लेकर बड़ा दावा टेक एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
ई-रिक्शा बंद करने वाली BAT-BMS ऐप दावा |

सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि चलते हुए ई-रिक्शा को मोबाइल ऐप की मदद से बंद किया जा सकता है। इन वीडियो में “BAT-BMS” नाम की एक चीनी ऐप का जिक्र किया जा रहा है।

दावा किया जा रहा है कि इस ऐप की मदद से ई-रिक्शा की बैटरी को ऑफ कर दिया जाता है, जिससे वाहन बीच सड़क पर ही रुक जाता है।

क्या है BAT-BMS ऐप?

बताया जा रहा है कि BAT-BMS एक Battery Management System (BMS) को मॉनिटर और कंट्रोल करने वाली ऐप है। यह लिथियम-आयन बैटरी की हेल्थ, वोल्टेज, करंट, चार्जिंग लेवल और तापमान की जानकारी रियल टाइम में देती है, ताकि बैटरी ओवरहीट होकर खराब या ब्लास्ट न हो।

कैसे हो रहा है कथित “कंट्रोल”?

टेक कंटेंट क्रिएटर अभिषेक भटनागर के अनुसार, ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाले कई BMS सिस्टम ब्लूटूथ-इनेबल्ड होते हैं और उन्हें पासवर्ड से सुरक्षित नहीं रखा जाता।

उनका कहना है कि यही बड़ी लापरवाही है, जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति नजदीक जाकर इस ऐप से कनेक्ट कर सकता है। कुछ मामलों में “रिमोट कट-ऑफ” फीचर के जरिए बैटरी बंद कर ई-रिक्शा को रोकने का दावा भी किया जा रहा है।

सुरक्षा को लेकर चिंता

टेक एक्सपर्ट्स ने सोशल मीडिया पर इस तरह के दावों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर यह सच है तो यह बेहद खतरनाक स्थिति है, क्योंकि इसका गलत इस्तेमाल सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा और यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

क्यों हो रही है यह समस्या?

अभिषेक भटनागर के अनुसार, कई ई-रिक्शा में BMS सिस्टम बिना यूजरनेम और पासवर्ड के ओपन मोड में छोड़ दिया जाता है। इसका कारण लापरवाही और तकनीकी जानकारी की कमी बताया गया है।

क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि ई-रिक्शा के BMS सिस्टम को पासवर्ड से सुरक्षित करना जरूरी है। साथ ही डीलर्स और सरकारी एजेंसियों को इसे अनिवार्य रूप से सुरक्षित बनाकर ही वाहन जारी करना चाहिए, ताकि किसी भी तरह के गलत इस्तेमाल से बचा जा सके।

इस मुद्दे ने अब इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा और सेफ्टी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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