UN मुख्यालय के बाहर आत्मदाह, तिब्बत विरोध की आशंका |
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर गुरुवार शाम एक 52 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो के अनुसार, वह व्यक्ति बौद्ध भिक्षु के वेश में था। घटना से पहले उसने संयुक्त राष्ट्र परिसर के बाहर फुटपाथ पर तिब्बती झंडा रखा। इसके बाद उसने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली।
मौके से पुलिस को कुछ पर्चे भी मिले, जिन पर "चीन को तिब्बत से निकालो" लिखा हुआ था। शुरुआती जांच में इस घटना को तिब्बत से जुड़े विरोध प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक आत्मदाह के पीछे की अंतिम वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि घटना उस समय हुई, जब दिन की सभी आधिकारिक बैठकें समाप्त हो चुकी थीं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र के नियमित कामकाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
20 साल से अमेरिका में रह रहा था व्यक्ति
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक की पहचान उसके एक दोस्त ने लोबगा रांगजेन के रूप में की है। बताया गया है कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था।
2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बतियों ने किया आत्मदाह
चीन के तिब्बत पर नियंत्रण के विरोध में वर्ष 2009 से अब तक 150 से अधिक तिब्बती आत्मदाह कर चुके हैं। इनमें बौद्ध भिक्षु, साध्वियां, छात्र, किसान और आम नागरिक शामिल हैं।
इस तरह का पहला चर्चित मामला फरवरी 2009 में सामने आया था, जब युवा भिक्षु तपे ने खुद को आग लगा ली थी। इसके बाद मार्च 2011 में किरती मठ के 21 वर्षीय भिक्षु फुंटसोग ने भी आत्मदाह किया। वर्ष 2012 और 2013 के दौरान ऐसी घटनाएं सबसे अधिक देखने को मिलीं।
साल 2014 के बाद चीन ने तिब्बत में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था कड़ी कर दी, जिसके बाद आत्मदाह की घटनाओं में कमी आई। हालांकि विरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
तिब्बती संगठनों का कहना है कि लोग चीन के शासन का विरोध, दलाई लामा की तिब्बत वापसी, धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी तथा तिब्बती भाषा और पहचान की रक्षा की मांग को लेकर ऐसा कदम उठाते हैं। कई मामलों में लोगों ने आत्मदाह से पहले "तिब्बत को आजाद करो", "दलाई लामा को वापस आने दो" और "चीन तिब्बत छोड़ो" जैसे संदेश भी छोड़े हैं।
वहीं, चीन का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे निर्वासित तिब्बती नेतृत्व लोगों को उकसाता है। दूसरी ओर निर्वासित तिब्बती प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि लोग चीन की नीतियों और बढ़ते दबाव से परेशान होकर यह कदम उठाते हैं।