Friday, July 03, 2026 06:56:28 PM

फास्टिंग थायरॉइड पर असर डाल सकती है
फास्टिंग का थायरॉइड पर पड़ सकता है असर! जानिए किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

इंटरमिटेंट फास्टिंग और लंबे उपवास का असर सिर्फ वजन पर ही नहीं, बल्कि थायरॉइड हार्मोन और मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ सकता है। जानिए किन लोगों को फास्टिंग के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

फास्टिंग का थायरॉइड पर पड़ सकता है असर जानिए किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
फास्टिंग थायरॉइड पर असर डाल सकती है |

आजकल वजन घटाने और बेहतर स्वास्थ्य के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग और लंबे समय तक उपवास रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग इसे शरीर को डिटॉक्स करने और मेटाबॉलिज्म सुधारने का आसान तरीका मानते हैं। लेकिन क्या फास्टिंग का असर थायरॉइड पर भी पड़ सकता है? विशेषज्ञों और स्टडीज के मुताबिक, लंबे समय तक कैलोरी की कमी थायरॉइड हार्मोन की गतिविधि को प्रभावित कर सकती है।

थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा उत्पादन और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब शरीर को लंबे समय तक पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, तो थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन और उनके काम करने की प्रक्रिया में बदलाव आ सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि लंबे समय तक फास्टिंग करने से T3 हार्मोन का स्तर कम हो सकता है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है।

क्या फास्टिंग से थायरॉइड की बीमारी हो सकती है?

फास्टिंग या उपवास सीधे तौर पर थायरॉइड रोग का कारण नहीं बनता, लेकिन लगातार कैलोरी की कमी थायरॉइड हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकती है।

गर्दन में तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि मुख्य रूप से T3 और T4 हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, हार्ट बीट, बॉडी टेम्परेचर और कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करते हैं।

एनसीबीआई (NCBI) के अनुसार, जब शरीर को पर्याप्त ऊर्जा या कैलोरी नहीं मिलती, तो वह ऊर्जा बचाने के लिए मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। इस दौरान T3 और T4 हार्मोन के बनने की मात्रा कम हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में फास्टिंग से थायरॉइड की बीमारी हो जाएगी, लेकिन जिन लोगों को पहले से थायरॉइड की समस्या है, उनमें इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है।

फास्टिंग के दौरान थायरॉइड हार्मोन पर क्या असर पड़ता है?

शरीर भोजन की उपलब्धता के अनुसार हार्मोन में बदलाव करता है। लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर "सर्वाइवल मोड" में चला जाता है।

एनसीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक

  • T3 हार्मोन का स्तर कम हो सकता है।
  • रिवर्स T3 का स्तर बढ़ सकता है।
  • मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, ताकि शरीर कम ऊर्जा खर्च करे।

थायरॉइड मरीजों में फास्टिंग से बढ़ सकते हैं ये लक्षण

अगर किसी व्यक्ति को पहले से हाइपोथायरॉइडिज्म है, तो गलत तरीके से या लंबे समय तक की गई फास्टिंग कुछ समस्याओं को बढ़ा सकती है।

थकान और कमजोरी बढ़ना:
थायरॉइड हार्मोन पहले से कम होने पर शरीर की ऊर्जा प्रभावित रहती है। लंबे समय तक भूखे रहने से थकान और कमजोरी ज्यादा महसूस हो सकती है।

ठंड ज्यादा लगना:
मायो क्लीनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, T3 हार्मोन कम होने पर शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे व्यक्ति को सामान्य से अधिक ठंड लग सकती है।

ध्यान लगाने में परेशानी:
मस्तिष्क को लगातार ग्लूकोज की जरूरत होती है। लंबे समय तक भोजन न मिलने और हार्मोनल बदलाव के कारण ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।

वजन कम होने की रफ्तार धीमी पड़ना:
हालांकि कई लोग वजन घटाने के लिए फास्टिंग करते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा कैलोरी कम करने पर मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग हमेशा नुकसान पहुंचाती है?

ऐसा जरूरी नहीं है। कई स्टडीज बताती हैं कि संतुलित तरीके से की गई इंटरमिटेंट फास्टिंग मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर की सूजन कम करने में मदद कर सकती है। यदि व्यक्ति पर्याप्त और संतुलित आहार ले रहा है तथा फास्टिंग की अवधि बहुत लंबी नहीं है, तो यह कई लोगों के लिए सुरक्षित हो सकती है। हालांकि, थायरॉइड मरीजों को फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

किन लोगों को फास्टिंग के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

एनसीबीआई की स्टडी के अनुसार, इन लोगों को फास्टिंग करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए—

  • जो लोग पहले से थायरॉइड की दवा ले रहे हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को फास्टिंग से बचना चाहिए।
  • कम वजन वाले लोगों में अतिरिक्त कैलोरी की कमी हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकती है।
  • Hashimoto’s Thyroiditis जैसे ऑटोइम्यून थायरॉइड रोग से पीड़ित मरीजों को फास्टिंग की अवधि और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

फास्टिंग सीधे तौर पर थायरॉइड रोग का कारण नहीं बनती, लेकिन यह थायरॉइड हार्मोन की कार्यप्रणाली और शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है। खासकर हाइपोथायरॉइडिज्म या अन्य थायरॉइड समस्याओं से जूझ रहे लोगों में लंबे समय तक भूखे रहने से लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह की फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त कैलोरी और सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ ही फास्टिंग अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो सकती है।


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