Friday, June 26, 2026 10:33:04 PM

इबोला खतरे पर भारत का बड़ा कदम
इबोला के खतरे के बीच भारत सरकार का बड़ा कदम, एयर सुविधा 2.0 पोर्टल किया लॉन्च

इबोला के बढ़ते खतरे के बीच भारत सरकार ने एयर सुविधा 2.0 पोर्टल लॉन्च किया है। विदेश से आने वाले यात्रियों को अब यात्रा से 24 घंटे पहले ऑनलाइन सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य होगा।

इबोला के खतरे के बीच भारत सरकार का बड़ा कदम एयर सुविधा 20 पोर्टल किया लॉन्च
इबोला खतरे पर भारत का बड़ा कदम |

इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने देश में संक्रमण की रोकथाम के लिए एयर सुविधा 2.0 पोर्टल शुरू किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। इसका उद्देश्य हाई-रिस्क देशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी कर वायरस के भारत में प्रवेश को रोकना है।

कांगो और युगांडा जैसे देशों में इबोला संक्रमण तेजी से फैल रहा है और कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसी को देखते हुए सरकार ने विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए नई व्यवस्था लागू की है।

क्या है एयर सुविधा 2.0 पोर्टल?

एयर सुविधा 2.0 नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा विकसित एक ऑनलाइन पोर्टल है। अब विदेश से भारत आने वाले सभी भारतीय और विदेशी यात्रियों को इस पोर्टल पर ऑनलाइन सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य होगा।

फॉर्म में देनी होगी ये जानकारी

यात्रियों को पोर्टल पर अपनी यात्रा और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें पिछले 21 दिनों की ट्रैवल हिस्ट्री, यानी किन-किन देशों की यात्रा की है, इसकी जानकारी देनी होगी। यदि यात्री को बुखार या इबोला से जुड़े कोई लक्षण हैं तो उसकी भी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट नंबर, फ्लाइट नंबर और अन्य जरूरी विवरण भी भरने होंगे।

कैसे करना होगा इस्तेमाल?

यात्रियों को भारत के लिए रवाना होने से कम से कम 24 घंटे पहले ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। फॉर्म भरने के बाद भारत पहुंचने पर एयरपोर्ट पर हेल्थ और इमीग्रेशन अधिकारियों को इसका डिजिटल या प्रिंटेड कॉपी दिखानी होगी। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

वायरस की रोकथाम में कैसे करेगा मदद?

एयर सुविधा 2.0 रियल-टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम पर आधारित है। यात्री द्वारा फॉर्म भरते ही उसकी जानकारी सीधे एयरपोर्ट के हेल्थ और इमीग्रेशन अधिकारियों तक पहुंच जाती है। इससे पहले ही पता चल जाता है कि कौन यात्री हाई-रिस्क क्षेत्र से आया है।

इस तकनीक की मदद से संदिग्ध यात्रियों की जल्द पहचान कर उनकी स्क्रीनिंग और मेडिकल जांच की जा सकेगी। साथ ही एयरपोर्ट पर भीड़ कम होगी और संक्रमण फैलने के खतरे को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।


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