Saturday, June 13, 2026 03:04:58 PM

14-15 साल के बच्चों में वेप और सिगरेट का बढ़ता खतरा
स्कूल बैग में किताबें नहीं, सिगरेट और वेप: आखिर 14-15 साल के बच्चे नशे की ओर क्यों बढ़ रहे हैं?

14-15 साल के बच्चों में सिगरेट और वेप का चलन बढ़ रहा है। WHO ने सोशल मीडिया के प्रभाव को चिंता का कारण बताया है। विशेषज्ञों ने संयुक्त कार्रवाई की जरूरत बताई है।

स्कूल बैग में किताबें नहीं सिगरेट और वेप आखिर 14-15 साल के बच्चे नशे की ओर क्यों बढ़ रहे हैं
14-15 साल के बच्चों में वेप और सिगरेट का बढ़ता खतरा |

कुछ साल पहले तक माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यह होती थी कि उनका बच्चा पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है या नहीं। लेकिन अब कई परिवारों के सामने एक नई और चौंकाने वाली समस्या खड़ी हो गई है। स्कूल जाने वाले 14-15 साल के बच्चों के बैग से सिगरेट, वेप (Vape), निकोटीन पाउच और अन्य नशे से जुड़े सामान मिलने लगे हैं।

यह समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, नोएडा, बेंगलुरु और कई दूसरे शहरों में स्कूलों और कॉलेजों के आसपास वेप और सिगरेट का इस्तेमाल बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

एक मां की चिंता

लखनऊ की एक महिला बताती हैं कि उन्हें तब झटका लगा जब उन्होंने अपने 15 वर्षीय बेटे के स्कूल बैग में एक वेप डिवाइस देखी।

उन्होंने कहा, "पहले लगा कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट होगा, लेकिन बाद में पता चला कि वह वेप है। मुझे समझ ही नहीं आया कि इतनी कम उम्र में यह उसके पास कैसे पहुंच गया।"

ऐसी शिकायतें अब कई शहरों में सुनने को मिल रही हैं।

आखिर बच्चे वेप तक पहुंच कैसे रहे हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं-

  • दोस्तों का दबाव (Peer Pressure)
  • सोशल मीडिया का प्रभाव
  • दिखावा और ट्रेंड फॉलो करने की मानसिकता
  • ऑनलाइन नेटवर्क
  • बड़े छात्रों या स्थानीय सप्लायरों के जरिए उपलब्धता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार ई-सिगरेट और वेप उत्पादों का प्रचार सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से युवाओं को आकर्षित करता है। कई उत्पाद ऐसे डिजाइन किए जाते हैं जो बच्चों को आकर्षक लगें।

स्कूलों के आसपास बढ़ती चिंता

हाल के वर्षों में विभिन्न शहरों से स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सिगरेट और वेप की बिक्री की रिपोर्टें सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में लुधियाना के कई स्कूलों और कॉलेजों के बाहर खुलेआम वेप और तंबाकू उत्पाद बिकने की बात सामने आई थी।

शिक्षकों का कहना है कि कई बार छात्र बाथरूम, खाली क्लासरूम या स्कूल के बाहर इनका इस्तेमाल करते पकड़े जाते हैं।

सोशल मीडिया का बड़ा रोल

इंस्टाग्राम रील्स, शॉर्ट वीडियो और कुछ ऑनलाइन कम्युनिटी में वेपिंग को "कूल" लाइफस्टाइल की तरह दिखाया जाता है। WHO का कहना है कि सोशल मीडिया पर ई-सिगरेट से जुड़े कंटेंट के संपर्क में आने वाले किशोरों में इन्हें आजमाने की संभावना बढ़ जाती है।

स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश वेप में निकोटीन होता है, जो बेहद लत लगाने वाला पदार्थ है।

अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार निकोटीन किशोरों के मस्तिष्क के विकास, सीखने की क्षमता, ध्यान और व्यवहार नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है।

WHO भी चेतावनी देता है कि किशोरावस्था में निकोटीन का सेवन मस्तिष्क के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

माता-पिता क्या करें?

विशेषज्ञ कुछ संकेतों पर ध्यान देने की सलाह देते हैं:

  • कमरे में मीठी या अजीब खुशबू आना
  • अचानक पैसे की मांग बढ़ना
  • नए दोस्तों का प्रभाव
  • व्यवहार में चिड़चिड़ापन
  • पढ़ाई में रुचि कम होना
  • बार-बार अकेले रहने की कोशिश

समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्ती से समस्या हल नहीं होगी।

  • स्कूलों में जागरूकता अभियान
  • माता-पिता और बच्चों के बीच खुली बातचीत
  • स्कूलों के आसपास निगरानी
  • ऑनलाइन बिक्री और सप्लाई चैन पर कार्रवाई
  • काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता

जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के बैग की जांच करने से पहले उनके साथ भरोसे का रिश्ता बनाएं। क्योंकि कई बार बच्चे जिज्ञासा, दबाव या दिखावे के कारण इस रास्ते पर कदम रखते हैं और समय रहते सही मार्गदर्शन मिलने पर वापस भी आ सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल

जब 14-15 साल की उम्र में बच्चों के बैग में किताबों के साथ सिगरेट और वेप मिलने लगें, तो यह केवल एक परिवार की समस्या नहीं रह जाती। यह समाज, स्कूल, प्रशासन और अभिभावकों सभी के लिए चेतावनी है कि आने वाली पीढ़ी को नशे के जाल से बचाने के लिए अब गंभीर कदम उठाने होंगे।


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