राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-1' जारी की है। इस पुस्तक में कई नए विषय शामिल किए गए हैं, जिनमें आपातकाल (Emergency), भारतीय ज्ञान परंपरा, चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), तथा महिला सशक्तिकरण प्रमुख हैं।
हालांकि, एनसीईआरटी की किताबों में किए गए बदलाव पिछले कुछ वर्षों से लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहे हैं। इस बार भी नई किताब को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बार क्या बदलाव हुए हैं, उन पर क्या लिखा गया है, किस तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं और पिछले तीन वर्षों में किन बदलावों पर विवाद हुआ था।
इस बार कक्षा 9 की किताब में क्या-क्या नया जोड़ा गया है?
नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में चार प्रमुख विषयों को विशेष रूप से शामिल किया गया है-
- 1975-77 के आपातकाल पर अलग अध्याय
- भारतीय ज्ञान परंपरा और वेदों की जानकारी
- चुनाव आयोग तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की भूमिका
- महिला सशक्तिकरण से जुड़ा नया खंड, जिसमें मनुस्मृति के एक श्लोक का भी उल्लेख किया गया है।
1. आपातकाल पर क्या पढ़ाया जाएगा?
नई पुस्तक में 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।
किताब के अनुसार उस समय देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के बीच जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया।
पुस्तक में बताया गया है कि इस दौरान-
- कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए।
- प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई।
- अनेक राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
- लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले आंदोलन तथा बिहार और गुजरात के जन आंदोलनों का भी उल्लेख किया गया है।
किताब में यह भी बताया गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने मतदान के माध्यम से सत्ता परिवर्तन किया, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।
हालांकि, आपातकाल पहली बार एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2007 में तत्कालीन यूपीए सरकार के दौरान इसे पहली बार कक्षा 12 की पुस्तक में शामिल किया गया था।
2. भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद और महिलाओं की स्थिति
नई पुस्तक में छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराया जाएगा। इसमें चारों वेद—
- ऋग्वेद
- यजुर्वेद
- सामवेद
- अथर्ववेद
के बारे में जानकारी दी गई है।
पुस्तक के अनुसार वैदिक काल में महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त था। उन्हें शिक्षा प्राप्त करने, धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने और सार्वजनिक सभाओं में शामिल होने का अवसर मिलता था।
किताब में यह भी उल्लेख है कि ऋग्वेद के अनेक सूक्त महिला ऋषियों—अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा—से जुड़े माने जाते हैं।
इसी संदर्भ में मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न रहते हैं।
साथ ही पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आने के कारण महिलाओं की स्थिति में उतार-चढ़ाव आया और कई मामलों में उनका सामाजिक दर्जा कमजोर हुआ।
3. चुनाव आयोग और SIR पर क्या बताया गया है?
नई पुस्तक में भारत की चुनाव प्रणाली और चुनाव आयोग की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) का भी उल्लेख किया गया है।
किताब के अनुसार—
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव कराने वाला देश है।
- गलत सूचना, फेक न्यूज, धनबल और अन्य चुनौतियों के बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराने में सफल रहा है।
- चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची तैयार करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) के उपयोग तथा स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने में उसकी भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।
4. महिला सशक्तिकरण पर नया अध्याय
पुस्तक में महिला सशक्तिकरण पर भी एक नया खंड जोड़ा गया है।
इसमें वैदिक काल में महिलाओं की सामाजिक स्थिति, उनके अधिकारों और सम्मान का उल्लेख किया गया है। इसी क्रम में मनुस्मृति के श्लोक का संदर्भ दिया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि बाद के समय में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक कारणों से महिलाओं की स्थिति में गिरावट आई।
इन बदलावों पर कैसी प्रतिक्रिया आई?
नई पुस्तक को लेकर राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि एनसीईआरटी पहले शिक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था थी, लेकिन अब इतिहास को तोड़-मरोड़कर छात्रों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि किताबों के माध्यम से छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने चुनाव आयोग और SIR को पुस्तक में शामिल किए जाने का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान लाखों मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ा था। उनके अनुसार, ऐसे विषय को इस रूप में पाठ्यपुस्तक में शामिल करना उचित नहीं है।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आपातकाल पर अलग अध्याय शामिल किए जाने का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को देश के इतिहास के उस दौर के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।
सोशल मीडिया पर भी इन बदलावों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
क्या हाल के दिनों में दूसरी किताबों पर भी विवाद हुआ?
1. कक्षा 6 की कन्नड़ पुस्तक 'कृष्णा' पर विवाद
हाल ही में कक्षा 6 की कन्नड़ R3 भाषा की पुस्तक 'कृष्णा' को लेकर विवाद हुआ।
कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि पुस्तक का नाम भगवान कृष्ण से प्रेरित है और इसमें शाकाहार को बढ़ावा दिया गया है।
इस पर एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि पुस्तक का नाम भगवान कृष्ण पर नहीं बल्कि कृष्णा नदी पर रखा गया है। परिषद ने यह भी कहा कि पुस्तक के "हेल्थ इज वेल्थ" अध्याय का उद्देश्य केवल संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन का उल्लेख और चित्र शामिल हैं तथा किसी एक प्रकार के भोजन का समर्थन या विरोध नहीं किया गया है।
2. मोहनजोदड़ो की 'डांसिंग गर्ल' की तस्वीर पर विवाद
कक्षा 9 की कला शिक्षा की पुस्तक 'मधुरिमा' में मोहनजोदड़ो की लगभग चार हजार वर्ष पुरानी कांस्य प्रतिमा 'डांसिंग गर्ल' की मूल तस्वीर की जगह एक डिजिटल रूप से संपादित चित्र प्रकाशित किया गया था, जिसमें प्रतिमा के खुले धड़ को ढक दिया गया था।
इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, कलाकारों और शिक्षाविदों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों और कला विरासत से छेड़छाड़ बताया।
विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी ने समीक्षा की और निर्णय लिया कि पुस्तक में प्रतिमा की मूल, बिना संपादित तस्वीर को दोबारा शामिल किया जाएगा। परिषद ने कहा कि संशोधित मूल चित्र डिजिटल संस्करण तथा आगामी प्रिंट संस्करणों में प्रकाशित किया जाएगा।
3. न्यायपालिका पर अध्याय को लेकर विवाद
फरवरी 2026 में कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका की भूमिका पर दिए गए एक अध्याय को लेकर विवाद हुआ।
इस अध्याय में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों, न्यायालयों में लंबित मामलों, भ्रष्टाचार, न्यायाधीशों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और कमजोर बुनियादी ढांचे का उल्लेख किया गया था।
इसमें न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता, शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS) तथा वर्ष 2017 से 2021 के बीच दर्ज 1,600 से अधिक शिकायतों का भी जिक्र था।
इस विषय को सबसे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया था, जिसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भी इस सामग्री पर आपत्ति जताई थी।
पिछले तीन वर्षों में किन बदलावों पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ?
अगस्त 2025: भारत विभाजन पर विशेष मॉड्यूल
एनसीईआरटी ने कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए भारत विभाजन पर दो विशेष मॉड्यूल जारी किए थे।
इन मॉड्यूल्स में विभाजन के लिए मुख्य रूप से तीन पक्षों—
- मोहम्मद अली जिन्ना,
- कांग्रेस,
- और लॉर्ड माउंटबेटन
—को जिम्मेदार बताया गया था।
साथ ही कहा गया था कि जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल ने परिस्थितियों के कारण विभाजन स्वीकार किया।
इन मॉड्यूल्स को लेकर कांग्रेस, एआईएमआईएम और अन्य विपक्षी दलों ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया था।
जुलाई 2025: मुगलकाल से जुड़े अध्यायों में बदलाव
इतिहास की पुस्तकों में मुगलकाल, दिल्ली सल्तनत और छत्रपति शिवाजी से जुड़े अध्यायों में कई संशोधन किए गए।
पुस्तकों में दिल्ली सल्तनत को बर्बर बताया गया तथा बाबर, अकबर और औरंगजेब के शासनकाल को विशेष रूप से असहिष्णुता और क्रूरता से जोड़ा गया।
हालांकि, पुस्तक में यह भी लिखा गया कि इतिहास के कठिन या काले अध्यायों को बिना किसी पूर्वाग्रह के पढ़ना जरूरी है, ताकि अतीत की गलतियों से सीख लेकर भविष्य बेहतर बनाया जा सके।
वर्ष 2024: संवेदनशील विषय हटाए गए
2024 में राजनीति विज्ञान की पुस्तकों से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों से जुड़े कई संदर्भ हटाए गए।
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े हिस्सों को भी समकालीन राजनीतिक बदलावों के अनुरूप संशोधित किया गया। इसके अलावा 2002 के गोधरा दंगों से संबंधित सामग्री में भी बदलाव किए गए।
वर्ष 2023: कई अध्याय हटाए गए
अप्रैल 2023 में एनसीईआरटी ने कक्षा 10, 11 और 12 की कई पुस्तकों में बड़े बदलाव किए।
सबसे अधिक चर्चा कक्षा 12 की इतिहास की पुस्तक से मुगल साम्राज्य, अकबरनामा, बादशाहनामा, मुगल दरबार और शाही प्रशासन से जुड़े अध्याय हटाने को लेकर हुई।
इसके अलावा राजनीति विज्ञान की पुस्तकों से 'राइज ऑफ पॉपुलर मूवमेंट्स', 'एरा ऑफ वन पार्टी डोमिनेंस', 'कोल्ड वॉर एरा' और 'अमेरिकी वर्चस्व' जैसे अध्याय भी हटाए गए।
एनसीईआरटी ने उस समय कहा था कि ये बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम को अद्यतन करने और दोहराव वाले विषयों को हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में आपातकाल, भारतीय ज्ञान परंपरा, चुनाव आयोग, SIR और महिला सशक्तिकरण जैसे नए विषयों को शामिल किया गया है। इन बदलावों को लेकर राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों और सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आई है।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब एनसीईआरटी की पुस्तकों में बदलाव विवाद का कारण बने हों। पिछले कुछ वर्षों में इतिहास, राजनीति विज्ञान, न्यायपालिका, भारत विभाजन, मुगलकाल और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई संशोधनों पर भी व्यापक बहस हुई है। कुछ मामलों में एनसीईआरटी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की, जबकि 'डांसिंग गर्ल' की तस्वीर जैसे मामलों में आलोचना के बाद संशोधन भी किया।