सेक्टर 39 स्थित जिला अस्पताल | पाठकराज
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नोएडा। सेक्टर 37 के लाल मार्केट स्थित लैब में भ्रूण लिंग परीक्षण का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने जिले के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच करने का निर्णय लिया है। नोएडा में करीब 300 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं, जहां नियमित जांच की जाती है। अब इन सभी पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम जांच अभियान चलाएगी।
डिप्टी सीएमओ डॉ. चंदन सोनी ने बताया कि डीएम की ओर से गठित कमेटी में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीम सेंटरों का औचक निरीक्षण करेगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग परीक्षण पूरी तरह से अवैध है और इसमें लिप्त पाए जाने वाले डॉक्टरों व सेंटरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
सूचना देने वालों को मिलेगा इनाम
डॉ. सोनी ने बताया कि भ्रूण लिंग परीक्षण की सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाता है। सही सूचना देने पर व्यक्ति को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यदि कोई गर्भवती महिला स्वयं इसकी सूचना देती है और मामला सही साबित होता है, तो उसे 35 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह व्यवस्था लोगों को भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी कुप्रथा के खिलाफ आगे आने के लिए प्रेरित करती है।
भ्रूण हत्या पर सख्त कानून
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, भ्रूण लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या "भ्रूण लिंग परीक्षण निषेध अधिनियम (पीसीपीएनडीटी एक्ट, 1994)" के तहत गंभीर अपराध है। इसके लिए दोषी पाए जाने पर डॉक्टर का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और आरोपी को जेल व जुर्माना दोनों भुगतना पड़ता है।
जिले में पहले भी हो चुके मामले
नोएडा में इससे पहले भी कई बार भ्रूण लिंग परीक्षण के मामले उजागर हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले वर्षों में कई सेंटरों के लाइसेंस निरस्त किए और डॉक्टरों पर मुकदमे दर्ज किए। बावजूद इसके, गुपचुप तरीके से यह काला धंधा जारी रहने की शिकायतें आती रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी भ्रूण लिंग जांच या इस संबंध में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत सूचना दें। विभाग का दावा है कि सख्त निगरानी और जनसहयोग से इस कुप्रथा पर रोक लगाई जा सकती है।