Tuesday, March 10, 2026 11:33:28 AM

नोएडा के सेक्टर 7 की फैक्ट्री में अफरा-तफरी
विकलांगों के उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भीषण आग, 60 लाख का नुकसान, फायर डिपार्टमेंट की लापरवाही उजागर

नोएडा के सेक्टर-7 ई ब्लॉक में गुप्ता ऑर्थो एड्स फैक्ट्री में आग लगने से नो हताहत, परंतु 50-60 लाख रुपये की संपत्ति क्षति।

 विकलांगों के उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भीषण आग 60 लाख का नुकसान फायर डिपार्टमेंट की लापरवाही उजागर
आग बुझाते दमकल कर्मी | पाठकराज
पाठकराज

नोएडा। सेक्टर-7 ई ब्लॉक स्थित गुप्ता ऑर्थो एड्स नामक फैक्ट्री में सोमवार सुबह करीब चार बजे आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस फैक्ट्री में विकलांगों के लिए उपकरण बनाए जाते हैं। दमकल विभाग की छह गाड़ियों ने करीब साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन करीब 50 से 60 लाख रुपये का माल जलकर राख हो गया।


 

पहली मंजिल पर फंसे थे गुप्ता दंपत्ति

आग लगने के समय कंपनी के पहली मंजिल पर मालिक के बड़े भाई सुभाष गर्ग और उनकी पत्नी श्यामति देवी फंसे हुए थे। दमकल कर्मियों ने सीढ़ियों की मदद से दोनों को बाहर निकाला। प्रथम तल पर रखी लकड़ी, फोम और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई। फायर ब्रिगेड को गेट और शीशे तोड़कर आग बुझाने का काम करना पड़ा।


 

आग का कारण और नुकसान

मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि आग लगने का कारण प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट सामने आया है। आग में लगभग 50 से 60 लाख रुपये का सामान जल गया। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई।


 

बिना फायर लाइसेंस और जर्जर बिल्डिंग

कंपनी के पास फायर लाइसेंस नहीं था और न ही अंदर कोई अग्निशमन व्यवस्था। बिल्डिंग की स्थिति बेहद जर्जर थी। खुले तार, बिखरे सिलेंडर और ज्वलनशील सामग्री सुरक्षा मानकों की अनदेखी का सबूत हैं।


 

संपत्ति विवाद और सुरक्षा उपेक्षा

फैक्ट्री के मालिक तीन भाई हैं। बड़े भाई सुभाष गर्ग और छोटे भाई आर.के. गुप्ता के बीच लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा है। आर.के. गुप्ता का आरोप है कि बड़े भाई ने पंजाब व नोएडा की शराब फैक्ट्रियों पर भी कब्जा कर रखा है। इस विवाद के कारण कंपनी का रखरखाव पूरी तरह उपेक्षित रहा।


 

पड़ोसियों का बयान

स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह करीब चार बजे अचानक कंपनी के पिछले हिस्से से धुआं निकलते देखा गया। उन्होंने तुरंत फायर डिपार्टमेंट को सूचना दी। गेट के पास खड़ी एक मोटरसाइकिल भी आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गई।


 

फायर डिपार्टमेंट की भूमिका पर सवाल

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कंपनी कई दशकों से बिना मानकों के चल रही थी। सवाल यह है कि क्या फायर डिपार्टमेंट ने कभी निरीक्षण किया? क्या विभाग ने जानबूझकर अनदेखी की?


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