सांकेतिक तस्वीर | पाठकराज
पाठकराज
नोएडा। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में राज्य सरकार ने नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, शामली और मुजफ्फरनगर में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी है। एनसीआर में हर साल दीपावली और अन्य त्योहारों पर पटाखों के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है। स्मॉग, सांस की बीमारियां और आंखों में जलन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश जारी किया था कि प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पटाखों की बिक्री और भंडारण पर सख्ती बरती जाए।
कानूनी प्रावधान और दंड
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा-15 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकतम पांच साल तक की जेल। एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड एक साथ दिए जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति सजा के बाद भी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर प्रति दिन 5,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।
पुलिस की विशेष तैयारी
उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिलों के प्रशासन को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। थानों को आदेश दिया गया है कि अवैध निर्माण स्थलों, गोदामों और बिक्री केंद्रों पर निगरानी रखी जाए। छापेमारी अभियान चलाकर नियम तोड़ने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
उद्योग और व्यापार पर असर
पटाखा उद्योग से जुड़े छोटे कारोबारी और दुकानदार इस निर्णय से प्रभावित होंगे। सरकार का कहना है कि प्रभावित व्यापारियों को वैकल्पिक व्यवसायों की ओर प्रोत्साहित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।