Tuesday, March 10, 2026 03:59:46 PM

सात साल की सजा
सोशल मीडिया के जाल में फंसे छात्र की मौत, दोषी को सात साल की सजा

ग्रेटर नोएडा में छात्र को फर्जी पहचान से फंसाकर ब्लैकमेल करने और मानसिक उत्पीड़न करने वाले अनिल बर्मन को सात साल का कारावास और जुर्माना सुनाया गया।

सोशल मीडिया के जाल में फंसे छात्र की मौत दोषी को सात साल की सजा
सांकेतिक तस्वीर | पाठकराज
पाठकराज

ग्रेटर नोएडा। सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर छात्र को प्रेमजाल में फंसाने, ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के मामले में अदालत ने आरोपी को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश-त्वरित न्यायालय-द्वितीय ने आरोपी अनिल बर्मन निवासी जयपुर (राजस्थान) को दोषी ठहराते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

 

फर्जी महिला प्रोफाइल से रचा गया षड्यंत्र

बीटा-2 कोतवाली क्षेत्र निवासी छात्र लॉ की पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उसकी पहचान "प्रिया अग्रवाल" नामक प्रोफाइल से हुई। यह प्रोफाइल दरअसल आरोपी अनिल बर्मन द्वारा बनाई गई थी। बातचीत के दौरान उसने छात्र की निजी तस्वीरें व वीडियो हासिल कर लिए और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे वसूले।

 

टूट गया छात्र, लिखा सुसाइड नोट

लगातार ब्लैकमेलिंग और मानसिक दबाव के कारण छात्र पूरी तरह टूट गया। 23 मार्च 2024 को उसका शव डाकिया बाबा गोलचक्कर के पास नहर में मिला। मोबाइल घर पर ही छोड़ा गया था, जिसमें धमकी भरे व्हाट्सएप संदेश मौजूद थे। छात्र द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में आरोपी अनिल बर्मन और कथित युवती "प्रिया अग्रवाल" का नाम दर्ज था।

 

जांच में मिले ठोस सबूत

पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि "प्रिया अग्रवाल" के नाम से प्रयुक्त मोबाइल नंबर अनिल बर्मन के पास था। साथ ही छात्र के बैंक खाते से आरोपी के खाते में 20 हजार रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर होने का भी प्रमाण मिला। मामले में बैंक मैनेजर सहित 11 गवाहों की गवाही अदालत में दर्ज की गई। मृतक छात्र परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी असमय मृत्यु ने माता-पिता को गहरे सदमे में डाल दिया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक न्याय की गुहार लगाई। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला।

 

अदालत की टिप्पणी

अदालत ने फैसले में कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को फंसाकर उनका मानसिक उत्पीड़न करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है ताकि समाज में भय और व्यवस्था दोनों स्थापित रह सके।


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