Thursday, June 04, 2026 11:27:03 PM

नोएडा के शराब ठेकों पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतें
नोएडा में शराब दुकानों पर MRP से ज्यादा वसूली, कार्रवाई की मांग

नोएडा के शराब ठेकों पर MRP से अधिक वसूली, बहस और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें बढ़ रही हैं। उपभोक्ताओं ने स्वतंत्र जांच, विशेष निगरानी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

नोएडा में शराब दुकानों पर mrp से ज्यादा वसूली कार्रवाई की मांग
नोएडा के शराब ठेकों पर अतिरिक्त वसूली की शिकायतें |

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में संचालित शराब ठेकों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। जिले के कई क्षेत्रों से यह आरोप सामने आ रहे हैं कि शराब दुकानों पर निर्धारित मूल्य (MRP) से अधिक कीमत वसूलने का खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही। यही कारण है कि अब यह मुद्दा केवल उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय निगरानी का भी विषय बन चुका है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई कंपोजिट शॉप और देशी शराब ठेकों पर ग्राहकों से खुलेआम ₹10, ₹20, ₹30 और कई मामलों में ₹50 तक अतिरिक्त रकम वसूली जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति किसी एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई हिस्सों में समान शिकायतें सुनने को मिल रही हैं। आरोप यह भी हैं कि अधिक पैसे देने से इनकार करने या निर्धारित मूल्य की मांग करने पर ग्राहकों के साथ बहस की जाती है तथा कई बार बिल देने में भी टालमटोल की जाती है।

मामला केवल ओवररेटिंग तक सीमित नहीं है। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा भी लगातार बढ़ रही है कि कुछ स्थानों पर निर्धारित समय से पहले शराब बिक्री शुरू होने और रात में दुकानें बंद होने के बाद भी कथित रूप से पिछले दरवाजों या अन्य माध्यमों से बिक्री जारी रहने की शिकायतें मिलती रही हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि आबकारी नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर मामला माना जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि उपभोक्ताओं द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही हैं, सोशल मीडिया पर वीडियो और आरोप सामने आ रहे हैं तथा स्थानीय स्तर पर इस विषय पर चर्चा हो रही है, तो फिर निगरानी और प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभाल रहे विभागीय अधिकारियों तक यह जानकारी क्यों नहीं पहुंच रही? और यदि पहुंच रही है, तो कार्रवाई का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा?

जिले के कई नागरिकों का मानना है कि शराब ठेकों पर ओवररेटिंग की समस्या कोई नई नहीं है। समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई की गति और उसका प्रभाव अक्सर सवालों के घेरे में रहा है। यही कारण है कि अब लोगों के बीच यह मांग जोर पकड़ रही है कि केवल औपचारिक निरीक्षणों के बजाय विशेष जांच अभियान चलाया जाए, जिसमें गुप्त निरीक्षण, रिकॉर्ड की जांच और सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा भी शामिल हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी दुकान पर MRP से अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं निर्धारित समय के बाहर शराब बिक्री के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह आबकारी नियमों के पालन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसे मामलों में केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता भी जांच के दायरे में आती है।

जनता की मांग है कि शासन स्तर से एक स्वतंत्र या विशेष जांच टीम गठित कर पूरे गौतम बुद्ध नगर जिले में संचालित शराब ठेकों की व्यापक जांच कराई जाए। साथ ही उन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए जहां ओवररेटिंग और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या मिलीभगत पाई जाती है, तो संबंधित लाइसेंसधारकों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

गौतम बुद्ध नगर में शराब ठेकों पर कथित ओवररेटिंग और अवैध वसूली का मुद्दा अब केवल कुछ अतिरिक्त रुपये वसूलने का मामला नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन की कसौटी बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और शासन इन बढ़ते जनसवालों का जवाब किस प्रकार देते हैं और उपभोक्ताओं के विश्वास को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


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