नोएडा। नोएडा में लंबे समय से बकाया चुकाने में लापरवाही बरत रहे प्रॉपर्टी डिफॉल्टर्स पर अब नोएडा अथॉरिटी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उद्योग, ग्रुप हाउसिंग, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल सेक्टर्स के डिफॉल्टर्स की लिस्ट नियमित रूप से अथॉरिटी की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए। इस कदम का मकसद पारदर्शिता लाना और बकाया रकम की वसूली को तेज करना है।
जून 2023 की लिस्ट अब होगी अपडेट
अधिकारियों के अनुसार, जून 2023 में 115 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की डिटेल्स वेबसाइट पर डाली गई थीं, जिनमें से ज्यादातर डिफॉल्टर्स थे। लेकिन तब से लिस्ट को अपडेट नहीं किया गया। अब नए सिरे से निर्देश दिए गए हैं कि डिफॉल्टर्स को नोटिस भेजे जाएं और लिस्ट नियमित रूप से अपडेट हो।
पुराने डिफॉल्टर्स पर रिकवरी सर्टिफिकेट
सीईओ ने यह भी कहा कि बड़े और पुराने डिफॉल्टर्स के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए जाएं ताकि रकम समय पर वसूल हो सके। इसी क्रम में तीन ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर कार्रवाई शुरू की गई है, जिन पर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। नोएडा अथॉरिटी ने गौतमबुद्ध नगर के जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर इस रकम की वसूली जमीन के बकाए के रूप में करने का अनुरोध किया है।
महागुन और प्रतीक रियल्टर्स पर कार्रवाई
इन बिल्डरों को कोविड-19 अवधि को “जीरो पीरियड” मानकर बकाया गणना में राहत दी गई थी और 25% रकम जमा करने की शर्त रखी गई थी, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। अब अथॉरिटी ने जिला प्रशासन से 353 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया है।
सबसे ज्यादा बकाया ग्रुप हाउसिंग सेक्टर में
नोएडा अथॉरिटी को सबसे ज्यादा बकाया ग्रुप हाउसिंग डेवलपर्स से है, इसके बाद कमर्शियल, संस्थागत और इंडस्ट्रियल सेक्टर के डिफॉल्टर्स आते हैं। कई बिल्डर्स ने किराया, प्रीमियम और ब्याज नहीं चुकाया, जिससे प्रोजेक्ट अधर में लटक गए और हजारों होमबायर्स प्रभावित हुए।