Tuesday, March 10, 2026 05:32:12 PM

जेवर एयरपोर्ट के नाम पर ठगी
जेवर एयरपोर्ट के नाम पर रियल एस्टेट ठगी: निवेशकों को फंसाने का नया जाल

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम पर बढ़ रही ठगी की घटनाएं। निवेशकों को फर्जी प्रोजेक्ट्स और दस्तावेज दिखाकर लुभाया जा रहा है।

जेवर एयरपोर्ट के नाम पर रियल एस्टेट ठगी निवेशकों को फंसाने का नया जाल
प्रोजेक्ट को इस तरह दिखाया जा रहा है | पाठकराज
पाठकराज

ग्रेटर नोएडा/अलीगढ़। देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल रोजगार और निवेश का केंद्र बन रहा है, बल्कि यह जालसाजों के लिए भी एक ‘गोल्डन चांस’ साबित हो रहा है। एयरपोर्ट के नाम पर निवेशकों को लुभाने और ठगने का धंधा इन दिनों चरम पर है।

 

वीकेंड पर बढ़ जाती है जालसाजी की सक्रियता

यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरते ही एयरपोर्ट के आसपास रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की तख्तियां लिए खड़े दर्जनों युवक दिखाई देते हैं। ये कथित सेल्समैन ग्राहकों को एयरपोर्ट से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर प्लॉट दिलाने का भरोसा देते हैं। खासकर शनिवार-रविवार को यह गतिविधियां और तेज हो जाती हैं।

 

बड़ी कंपनियों की आड़ में छोटे बिल्डरों का खेल

जहां नामी रियल एस्टेट कंपनियां अपने वैध प्रोजेक्ट्स ला रही हैं, वहीं छोटे बिल्डर और फर्जी कंपनियां भी सक्रिय हो गई हैं। ये एजेंट आकर्षक ब्रोशर, नकली नक्शे और अथॉरिटी के फर्जी दस्तावेज दिखाकर भरोसा दिलाते हैं। कई मामलों में तो टोकन मनी लेने के बाद एजेंट गायब हो जाते हैं, जबकि कुछ नकली रजिस्ट्री तक करा डालते हैं।

 

कैसे रचते हैं फरेब की कहानी

बाकायदा टाउनशिप का ब्रोशर और डिजाइन दिखाया जाता है। प्लॉट पर बाउंड्री वॉल, सड़क और पार्क बनाकर ग्राहकों को भ्रमित किया जाता है। ग्राहकों को नोएडा से पिकअप-ड्रॉप की सुविधा दी जाती है। एयरपोर्ट और फिल्म सिटी जैसी परियोजनाओं की नजदीकी का दावा किया जाता है। नकली दस्तावेज और ‘प्राइवेट जमीन’ का झांसा देकर टोकन मनी ली जाती है।

 

सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा खैर तहसील में

अलीगढ़ जिले की खैर तहसील के 92 गांव मास्टर प्लान में शामिल हैं। यही वजह है कि अधिकतर फर्जी प्रोजेक्ट इसी इलाके में दिखाए जा रहे हैं। यहां प्रॉपर्टी की कीमतें 16–18 हजार रुपये प्रति गज और कॉमर्शियल जमीन 18–24 हजार रुपये प्रति गज बताई जाती है। जेवर टोल प्लाजा पार करते ही सिमरौथी गांव में ‘श्री तुलसी वाटिका’ नाम से एक बड़ा प्रोजेक्ट दिखाया जा रहा है। करीब 200 बीघा में फैले इस कथित प्रोजेक्ट पर सेल्समैन दावा करते हैं कि एयरपोर्ट सिर्फ 24 किलोमीटर दूर है और भविष्य में यह एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा।

 

आसान पेमेंट प्लान का लालच

40% भुगतान पर बाउंड्री वॉल बनाने का दावा।

20% और भुगतान पर रजिस्ट्री कराने का भरोसा।

शेष रकम एक साल में चुकाने की शर्त।

किसी भी प्रोजेक्ट पर बैंक लोन उपलब्ध नहीं, जिससे असली मंशा उजागर हो जाती है।

 

निवेशकों को चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट के नाम पर चल रही इस ठगी से बचने के लिए निवेशकों को जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण से सत्यापन कराना चाहिए। एयरपोर्ट के आसपास वैध प्रोजेक्ट जरूर हैं, लेकिन साथ ही धोखेबाजों का नेटवर्क भी उतना ही मजबूत है।


सम्बन्धित सामग्री


हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें!

विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनें