Friday, June 19, 2026 08:12:15 PM

होर्मुज पार कर दाहेज पहुंचा LNG टैंकर दिशा
होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात पहुंचा LNG टैंकर 'दिशा', 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर दाहेज पोर्ट पहुंचा

62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के दाहेज पोर्ट पहुंचा। ईरान संघर्ष के बाद यह पहला भारतीय LNG टैंकर है जो इस मार्ग से भारत पहुंचा।

होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात पहुंचा lng टैंकर दिशा 62370 मीट्रिक टन गैस लेकर दाहेज पोर्ट पहुंचा
होर्मुज पार कर दाहेज पहुंचा LNG टैंकर दिशा |

एलएनजी टैंकर 'दिशा' सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद गुजरात के दाहेज बंदरगाह पहुंच गया है। माल्टा के झंडे वाला यह टैंकर 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) लेकर आया है।

करीब साढ़े तीन महीने पहले शुरू हुए ईरान संघर्ष के बाद यह पहला भारतीय एलएनजी टैंकर है, जिसने होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत तक अपना सफर पूरा किया है।

दाहेज बंदरगाह पर पहुंचा टैंकर

भरूच बंदरगाह प्राधिकरण के अनुसार, LNGC दिशा नाम का यह जहाज शुक्रवार सुबह दाहेज बंदरगाह पहुंचा। फिलहाल इसे पेट्रोनेट एलएनजी जेटी पर खड़ा किया गया है।

यह टैंकर शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा संचालित किया जाता है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने चार्टर किया है।

सीजफायर के बाद होर्मुज पार करने वाले पहले जहाजों में शामिल

अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले पहले व्यावसायिक जहाजों में यह टैंकर भी शामिल है।

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने एक दिन पहले बताया था कि यह टैंकर 15 जून को करीब 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो के साथ होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा था और इसके 20 जून को दाहेज पहुंचने की उम्मीद थी।

भारत की गैस जरूरतों में अहम भूमिका

भारत अपनी प्राकृतिक गैस की कुल मांग का लगभग आधा हिस्सा एलएनजी आयात के जरिए पूरा करता है। इनमें से करीब 65 प्रतिशत गैस कतर सहित खाड़ी देशों से आती है और इसकी आपूर्ति होर्मुज समुद्री मार्ग के जरिए की जाती है।

ईरान संघर्ष के कारण प्रभावित हुआ था मार्ग

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। इससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।

हालांकि, इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बाद तेहरान ने 60 दिनों के लिए जहाजों को बिना किसी शुल्क के इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसी के बाद एलएनजी टैंकर 'दिशा' सुरक्षित रूप से भारत पहुंच सका।

भारत के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आने वाली एलएनजी पर निर्भर करता है।


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