लखीमपुर खीरी डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल | पाठकराज
पाठकराज
नई दिल्ली। चर्चित और सख्त छवि वाली आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने उनसे दिल्ली स्थित पूसा रोड कैंपस के सरकारी बंगले पर अधिकृत अवधि से अधिक समय तक कब्ज़ा बनाए रखने के आरोप में ₹1.63 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस भेजा है।
संस्थान का आरोप है कि नागपाल ने मई 2022 से फरवरी 2025 तक बंगले पर “अनधिकृत कब्ज़ा” बनाए रखा। यह अवधि उनके आवंटन की समय सीमा से कहीं अधिक थी। इस वजह से संस्थान ने उन्हें भारी जुर्माने की राशि चुकाने का आदेश दिया है।
स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला
वर्तमान में लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि उन्होंने बंगले पर विस्तार की अनुमति अपने माता-पिता की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मांगी थी। उन्होंने दंडात्मक शुल्क को माफ करने का अनुरोध भी संस्थान से किया था, लेकिन मामला अब कानूनी और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है।
कौन हैं दुर्गा शक्ति नागपाल?
2010 बैच की आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल मूल रूप से आगरा की रहने वाली हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमेन से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है। वे अपनी सख्त और निडर प्रशासनिक शैली के लिए जानी जाती हैं। 2013 में उत्तर प्रदेश में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई कर उन्होंने सुर्खियाँ बटोरी थीं, जिसके बाद उनका निलंबन भी हुआ था — लेकिन बाद में केंद्र और राज्य स्तर पर उन्हें व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में दूसरी कोशिश में 20वीं रैंक हासिल कर आईएएस में जगह बनाई थी। पहली बार में उनका चयन आईआरएस (भारतीय राजस्व सेवा) में हुआ था।
मामले ने बढ़ाई हलचल
कृषि संस्थान के हर्जाने के नोटिस के बाद नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ बंगले के कब्ज़े तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और नियमों के पालन पर भी बहस को जन्म देगा।