Tuesday, March 10, 2026 02:33:14 PM

ग्रेटर नोएडा में बिल्डरों पर जुर्माना
ग्रेटर नोएडा: सीवेज प्रबंधन में लापरवाही पर बिल्डरों पर 54 लाख का जुर्माना

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सात बिल्डरों पर 54 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को सक्रिय नहीं रखा।

ग्रेटर नोएडा सीवेज प्रबंधन में लापरवाही पर बिल्डरों पर 54 लाख का जुर्माना
ग्रेनो प्राधिकरण | पाठकराज
पाठकराज

ग्रेटर नोएडा। जल प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है। प्राधिकरण के सीवर विभाग ने जांच में लापरवाही पाए जाने पर सात बिल्डरों पर कुल 54 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि इन बिल्डरों ने अपनी सोसाइटियों में बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को सक्रिय नहीं रखा और बिना शोधित सीवेज सीधे नालों में छोड़कर प्रदूषण फैलाया।

 

किन बिल्डरों पर लगा जुर्माना?

  • राजहंस रेजिडेंसी, सेक्टर-1 – 5 लाख रुपये

  • पैरामाउंट इमोशंस, सेक्टर-1 – 5 लाख रुपये

  • देविका होम्स, सेक्टर-1 – 10 लाख रुपये

  • कैपिटल एथिना, सेक्टर-1 – 5 लाख रुपये

  • पंचशील हाइनिस, सेक्टर-1 – 12 लाख रुपये

  • जेएम फ्लोरेंस, टेकजोन-4 – 5 लाख रुपये

  • पंचशील ग्रीन्स-2, सेक्टर-16 – 12 लाख रुपये

 

प्राधिकरण की चेतावनी

प्राधिकरण ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि तुरंत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के खाते में जमा की जाए और इसकी प्रति प्राधिकरण को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगली जांच में दोबारा खामी पाए जाने पर न केवल एफआईआर दर्ज होगी बल्कि लीज डीड और भवन नियमावली की शर्तों के तहत कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।

 

सीईओ और एसीईओ का रुख

सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नए एसटीपी निर्माण का कार्य तेज गति से चल रहा है। वहीं, आईटी सिटी में भी एसटीपी निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। इसके बावजूद कुछ बिल्डर नियमों की अनदेखी कर प्रदूषण फैलाने में लगे हैं।

 

एसीईओ प्रेरणा सिंह ने स्पष्ट किया—
"हमारा लक्ष्य है कि ग्रेटर नोएडा से निकलने वाले सीवरेज का 100% शोधन हो और साफ पानी को पुनः उपयोग किया जाए। बिना शोधित सीवेज नालों में गिराने वालों पर किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। सीवर विभाग नियमित जांच करेगा और खामी मिलने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

 

बड़ा संदेश बिल्डरों के लिए

यह कार्रवाई साफ संकेत है कि प्राधिकरण अब पर्यावरण से समझौता करने वाले बिल्डरों को बख्शने के मूड में नहीं है। अन्य बिल्डरों के लिए भी यह चेतावनी है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो भारी आर्थिक और कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ेगी।


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