अधिवक्ता यशपाल शर्मा | पाठकराज
पाठकराज
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सभी जिला अदालतों में लगातार पांचवें दिन कामकाज ठप रहा। अधिवक्ताओं ने उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के 13 अगस्त को जारी आदेश के खिलाफ कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। इस आदेश में प्रावधान है कि पुलिस गवाहों की गवाही अब थानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज की जाएगी।
वकीलों का आरोप – न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता यशपाल शर्मा का कहना है कि यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 308 का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा –
“जब पुलिस ही केस बनाएगी और गवाही भी थाने में देगी, तो अदालत और न्यायाधीश का महत्व कहाँ रह जाएगा? इससे छेड़छाड़ और पक्षपात की आशंका बढ़ेगी और न्याय का संतुलन बिगड़ सकता है।”
पिछले विवाद की याद
यशपाल शर्मा ने यह भी याद दिलाया कि अधिवक्ताओं ने पहले एडवोकेट अमेंडमेंट बिल का भी विरोध किया था, जिसके चलते सरकार को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था। उनका आरोप है कि बार काउंसिल या बार एसोसिएशन से परामर्श लिए बिना ही ऐसे निर्णय लिए जाते हैं।
विरोध के बढ़ते स्वर
-
पहले तीन दिनों तक वकीलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
-
चौथे दिन नारेबाजी और चक्का जाम किया गया।
-
सरकार के रुख में कोई बदलाव न होने पर हड़ताल जारी है।
लाखों केसों पर असर
दिल्ली की अदालतों में लाखों केस लंबित हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि –
वकीलों की चेतावनी
वकीलों ने कहा है कि जब तक आदेश वापस नहीं लिया जाएगा, हड़ताल जारी रहेगी। यदि मांग अनसुनी की गई, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।