Saturday, September 05, 2026 02:29:07 AM

कानपुर में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार
फर्जी दिव्यांग बनकर नौकरी का खेल! कानपुर में सॉल्वर गैंग के 4 सदस्य गिरफ्तार

कानपुर में यूपी STF और सचेंडी पुलिस ने सॉल्वर गैंग का खुलासा कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र, सॉल्वर बैठाने और लाखों रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ है।

फर्जी दिव्यांग बनकर नौकरी का खेल कानपुर में सॉल्वर गैंग के 4 सदस्य गिरफ्तार
कानपुर में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार |

यूपी एसटीएफ और सचेंडी थाना पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने परीक्षा में असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर और लेखक सहायक बैठाकर नौकरी दिलाने की कोशिश करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई 22 अगस्त को बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान यानी IBPS की प्रोबेशनरी ऑफिसर और मैनेजमेंट ट्रेनी प्रारंभिक परीक्षा के दौरान भैलामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पर हुई।

परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर पुलिस को शक हुआ। जांच में पता चला कि अवनीश यादव की जगह आशीष कुमार और एक युवती की जगह बिहार निवासी राहुल कुमार सिन्हा लेखक सहायक बनकर परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। पूछताछ में दोनों संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी अवनीश यादव पूरी तरह स्वस्थ है और उसने पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है। इसके बावजूद उसने साल 2025 में करीब एक लाख रुपये देकर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया था। इस प्रमाणपत्र को बनवाने में मनोज कुमार यादव और शमशेर उर्फ शीलू सचान की भूमिका सामने आई है।

अवनीश ने यह भी बताया कि इससे पहले दो परीक्षाओं में उसकी जगह लेखक सहायक बैठ चुके हैं। 22 अगस्त की परीक्षा के लिए आशीष कुमार को 30 हजार रुपये देने की बात तय हुई थी। पुलिस को मोबाइल से भुगतान की रसीद और बातचीत भी मिली है।

जांच में ग्रामीण बैंक में वसूली प्रबंधक अंकित सचान की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, अंकित अपनी प्रेमिका को दिव्यांग कोटे से नौकरी दिलाना चाहता था। इसके लिए उसने 2024 में करीब 65 हजार रुपये देकर उसका फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया था।

इसके बाद परीक्षा पास कराने के लिए 10 लाख रुपये में सौदा तय किया गया। 21 और 22 अगस्त को एडवांस के तौर पर 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।

पुलिस के मुताबिक, राहुल कुमार सिन्हा को अंकित सचान ने ही लेखक सहायक के तौर पर बुलाया था। आरोपियों के मोबाइल फोन और एक आईपैड की जांच में कई परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, लेखक सहायक फॉर्म, फर्जी प्रमाणपत्र और पैसों के लेन-देन की चैट मिली हैं।

पूछताछ में राहुल ने बताया कि दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और ऑनलाइन पढ़ाने के दौरान वह ऐसे लोगों के संपर्क में आया था, जो स्वस्थ अभ्यर्थियों के फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर उन्हें सॉल्वर और लेखक सहायक उपलब्ध कराते थे।

इस मामले में शमशेर उर्फ शीलू सचान, मनोज कुमार यादव, सुरजीत कुमार, मनोरंजन, राजू गुप्ता, मनीष कुमार मिश्रा और राहुल यादव समेत कई अन्य नाम सामने आए हैं।

फिलहाल पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों ने पहले कितनी परीक्षाओं में इसी तरह फर्जीवाड़ा किया है।


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