Saturday, October 10, 2026 11:16:26 PM

मेरठ में 16,726 अवैध निर्माण होंगे सील
मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीलिंग और कार्रवाई के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के जोन-A में चिन्हित 16,726 अवैध निर्माणों को सील कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बाकी तीन जोन की विस्तृत रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में मांगी गई है।

मेरठ में 16726 अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त सीलिंग और कार्रवाई के आदेश
मेरठ में 16,726 अवैध निर्माण होंगे सील |

मेरठ। सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध और अनधिकृत निर्माणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जोन-A में चिन्हित 16,726 अवैध निर्माणों को सील करने और उनके खिलाफ जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इनमें आवासीय, गैर-आवासीय और दोनों तरह के इस्तेमाल वाली संपत्तियां शामिल हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में विकसित अवैध आवासीय कॉलोनियों की विस्तृत जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी गठित किया है।

एक जोन में ही मिले 16 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण

उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी गुरु प्रसाद की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।

मेरठ को सर्वे के लिए चार हिस्सों—जोन A, B, C और D में बांटा गया है। अदालत के 21 सितंबर के आदेश के मुताबिक, जोन-A में लगाई गई 16 टीमों ने 16,726 निर्माणों को पूरी तरह अवैध या अनधिकृत पाया।

इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय और गैर-आवासीय दोनों तरह के, जबकि 2,945 गैर-आवासीय निर्माण शामिल हैं।

पहले परिसर खाली कराएं, फिर करें सील

अवैध निर्माण से जुड़े पुराने निर्देशों का पालन नहीं होने पर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

अदालत ने कहा कि पहला कदम इन परिसरों को खाली कराना और उसके बाद सभी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना होगा।

कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि इनमें कुछ इमारतें जर्जर हालत में हो सकती हैं। ऐसी इमारतों के गिरने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए।

बाकी तीन जोन की भी मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा स्थिति रिपोर्ट में जोन-B, C और D में मौजूद अवैध निर्माणों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है।

अदालत ने संबंधित प्राधिकरण को अगली सुनवाई में तीनों जोन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही चारों जोन में जरूरी कार्रवाई जारी रखने को कहा गया है।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर लापरवाही के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति की जान जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

उल्देपुर में 44 संपत्तियों पर हुई कार्रवाई

उल्देपुर में पहले सील की गई 44 संपत्तियों को लेकर भी कोर्ट को जानकारी दी गई। इनमें से 20 संपत्तियों को गिराया जा चुका है और वहां हो रहे अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोक दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 44 में से 38 संपत्तियों के भवन नक्शे मंजूर थे, लेकिन उनमें बाद में अनधिकृत और अतिरिक्त निर्माण कर लिया गया। इनका व्यावसायिक इस्तेमाल भी किया जा रहा था।

वहीं छह संपत्तियां प्लॉट के रूप में बेची गई थीं, जहां बिना योजना या नक्शे की मंजूरी के आवासीय और व्यावसायिक निर्माण किए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने बाकी 24 संपत्तियों को भी जल्द से जल्द गिराने का निर्देश दिया है।

पांच साल तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आयोग करेगा जांच

जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाला न्यायिक आयोग इस बात की जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण पांच साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय क्यों रहा, जिससे अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित होती चली गईं।

आयोग यह भी जांच करेगा कि इन कॉलोनियों के विकास में मेरठ विकास प्राधिकरण के किसी अधिकारी की मिलीभगत थी या नहीं। साथ ही जिम्मेदार लोगों की पहचान भी की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में करने का निर्देश दिया है। तब तक अधिकारियों को की गई कार्रवाई की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी।


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