वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत |
वृंदावन। परिक्रमा मार्ग के बाराहघाट स्थित श्रीराधा केलिकुंज के पास एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद संत प्रेमानंद महाराज के 25 वर्षीय शिष्य की मौत हो गई। मृतक की पहचान दीपक उर्फ रसिक दुलारी शरण के रूप में हुई है। वह मूल रूप से जबलपुर का रहने वाला था और वर्ष 2025 से वृंदावन में रहकर भजन-साधना कर रहा था।
घटना शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे राधावाटिका वाली गली में स्थित गुरुकृपा धाम की है। इसी इमारत में श्रीराधा केलिकुंज से जुड़े करीब 50 अन्य साधक भी रहते हैं।
बताया जा रहा है कि दीपक इमारत की चौथी मंजिल से नीचे गिरा था। उसने खुद छलांग लगाई या वह किसी हादसे का शिकार हुआ, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है।
शरीर पर गंभीर चोट, पुलिस कर रही जांच
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब दीपक नीचे गिरा तो उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और उसका गुप्तांग भी कटा हुआ था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि युवक ने गिरने से पहले ग्राइंडर से खुद को गंभीर रूप से घायल किया था। हालांकि घटना के पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे के कारणों की पुलिस जांच कर रही है।
घायल दीपक को इलाज के लिए सर्वोदय हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां शुक्रवार शाम उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका
सीओ वृंदावन वन सर्किल संदीप सिंह के मुताबिक, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस दूसरे पहलुओं की भी जांच कर रही है। मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है और शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
दीपक संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षित था और वृंदावन में रहकर भजन-साधना करता था।
करीब चार घंटे बाद पुलिस को मिली सूचना
घटना को लेकर सूचना मिलने के समय पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना सुबह करीब 10:30 बजे हुई। घायल साधक कुछ समय तक घटनास्थल पर ही पड़ा रहा, जिसके बाद प्रबंधन से जुड़े लोग उसे निजी वाहन से अस्पताल लेकर गए।
बताया गया है कि इस दौरान पुलिस या प्रशासन को घटना की सूचना नहीं दी गई। दोपहर करीब 2 बजे के बाद अस्पताल से सूचना मिलने पर पुलिस को मामले की जानकारी हुई।
इसके बाद एसपी सिटी, सीओ और कोतवाली प्रभारी समेत पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक इमारत से कैसे गिरा और घटना के पीछे क्या कारण थे।