पीएम सूर्य घर योजना लोन रिश्वत आरोप नरौरा |
बुलंदशहर/डिबाई (तहसील प्रभारी नीरज सुदामा): केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती रही हैं कि उनकी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, समय-समय पर सामने आने वाली कुछ शिकायतें इन दावों पर सवाल खड़े करती हैं। ताजा मामला नरौरा स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शाखा से जुड़ा हुआ है, जहां पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत सोलर प्लांट लगाने के लिए लोन स्वीकृत कराने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम चौढ़ेरा निवासी लाखन सिंह ने आरोप लगाया है कि बैंक मैनेजर विनय कुमार और संविदा कर्मचारी शशांक मित्तल योजना से संबंधित सर्वे के लिए उनके घर पहुंचे थे। लाखन सिंह का कहना है कि इस दौरान उन्हें लोन फाइल स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया गया। आरोप है कि बैंक मैनेजर का हवाला देते हुए संविदा कर्मचारी शशांक मित्तल ने उनसे 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह राशि लोन पास कराने की प्रक्रिया के नाम पर ली गई।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य लोगों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और बिजली संबंधी खर्च को कम करना है। ऐसे में योजना से जुड़े किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं।
मामले में जब संबंधित बैंक अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। अधिकारियों की ओर से स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिलने से मामले को लेकर और भी सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करती है कि यदि जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें सामने आती रहेंगी, तो जरूरतमंद और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पहुंचाना कठिन हो सकता है। स्थानीय स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।