Saturday, October 10, 2026 11:14:15 PM

गौतम बुद्ध नगर शराब ओवररेटिंग जांच
शराब ओवररेटिंग पर आबकारी विभाग के दावों पर सवाल, ग्राउंड पर नहीं दिखे स्कैनर और टोल-फ्री नंबर

गौतम बुद्ध नगर में शराब ओवररेटिंग की शिकायतों के बीच आबकारी विभाग के दावों पर जमीनी हकीकत ने सवाल खड़े किए।

शराब ओवररेटिंग पर आबकारी विभाग के दावों पर सवाल ग्राउंड पर नहीं दिखे स्कैनर और टोल-फ्री नंबर
गौतम बुद्ध नगर शराब ओवररेटिंग जांच |

गौतम बुद्ध नगर। जिले के विभिन्न इलाकों से शराब की ओवररेटिंग, देर रात कथित बिक्री और अवैध शराब की बिक्री को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। शिकायतों पर आबकारी विभाग की ओर से जांच, नोटिस और संबंधित दुकान पर कर्मचारी भेजकर खरीदारी के जरिए ओवररेटिंग की पुष्टि करने की बात कही जाती है।

सरफाबाद स्थित कंपोजिट शॉप से जुड़ी शिकायत पर भी सर्किल इंस्पेक्टर की ओर से बताया गया कि दुकान को नोटिस दिया गया है और खरीदारी करवाकर यह जांच की जाएगी कि ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं या नहीं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी दुकान के खिलाफ शिकायत और उससे जुड़े साक्ष्य विभाग के सामने पहुंचते हैं, तो उनकी जांच किस प्रक्रिया के तहत और कितनी जल्दी की जाती है?

इन्हीं शिकायतों को लेकर Pathakraj News ने जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार से संपर्क किया। उन्होंने वीडियो पर बातचीत करने से इनकार किया, जिसके बाद ऑडियो के माध्यम से उनका पक्ष लिया गया।

सुबोध कुमार ने बताया कि शराब की दुकानों पर स्कैनर लगाए गए हैं, जिनके जरिए ग्राहक बोतल को स्कैन कर उसका निर्धारित मूल्य देख सकता है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था के बाद ओवररेटिंग नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि दुकानों पर शिकायत दर्ज कराने के लिए तीन टोल-फ्री/संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें एक नंबर उनका भी है। ओवररेटिंग रोकने के लिए जिले में दो टीमें और एक स्पेशल टीम निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से चेकिंग गोपनीय तरीके से भी की जाती है।

इसके बाद Pathakraj News की टीम ने इन दावों की जमीनी स्थिति जानने के लिए संबंधित दुकान का जायजा लिया। टीम के निरीक्षण के दौरान वहां वह स्कैनर नजर नहीं आया, जिसका जिक्र अधिकारी ने किया था। शिकायत के लिए बताए गए नंबर भी टीम को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नजर नहीं आए।

ऐसे में आबकारी विभाग के सामने सवाल है कि यदि दुकानों पर स्कैनर, शिकायत नंबर और निगरानी के लिए टीमें मौजूद हैं, तो संबंधित दुकान पर ये व्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से क्यों दिखाई नहीं दीं?

एक सवाल शिकायतों की जांच प्रक्रिया को लेकर भी है। यदि कोई आम नागरिक या मीडिया ओवररेटिंग की शिकायत के साथ उपलब्ध साक्ष्य विभाग को देता है, तो क्या उन साक्ष्यों की तत्काल जांच की जाती है या कार्रवाई से पहले विभागीय कर्मचारी द्वारा दुकान से खरीदारी कर ओवररेटिंग की पुष्टि करना जरूरी होता है?

अब देखना होगा कि संबंधित दुकान की शिकायत पर विभाग की जांच में क्या सामने आता है और ओवररेटिंग पाए जाने की स्थिति में क्या कार्रवाई की जाती है।


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