डायट दनकौर में प्रज्ञा प्रवाह प्रशिक्षण का समापन |
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) दनकौर में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय 'प्रज्ञा प्रवाह' प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का शनिवार को समापन हो गया। प्रशिक्षण के अंतिम दिन शिक्षकों को विद्यालय प्रबंधन, कक्षा संचालन, परिवार और समाज की भूमिका, ध्यान (माइंडफुलनेस) तथा मूल्य आधारित शिक्षण जैसे विषयों पर सरल और गतिविधि आधारित प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विद्यालयों में ऐसा माहौल बनाया जाए, जहां बच्चों को समानता, सम्मान, सहयोग, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा व्यवहार के माध्यम से मिल सके। शिक्षकों को यह भी बताया गया कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार और समाज की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में प्रतिभागी शिक्षकों ने मानवीय और संवैधानिक मूल्यों को पढ़ाई और विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ने वाली अपनी शिक्षण योजनाएं भी प्रस्तुत कीं। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों का फीडबैक और मूल्यांकन भी किया गया।
प्रशिक्षण में विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने गतिविधि आधारित सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को यह समझाया कि समानता, न्याय, स्वतंत्रता, बंधुत्व, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को रोजमर्रा की कक्षा और विद्यालयी गतिविधियों में कैसे शामिल किया जाए।
प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी राजेश खन्ना ने कहा कि इस प्रशिक्षण की असली सफलता तभी होगी, जब इसकी सीख बच्चों के व्यवहार और विद्यालय के वातावरण में दिखाई दे। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे पढ़ाई के साथ-साथ समूह गतिविधियों और संवाद के जरिए भी विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार विकसित करें।
डायट की प्राचार्या अर्चना गुप्ता ने कहा कि बच्चों में मानवीय और संवैधानिक मूल्यों को विकसित करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में मिली सीख को विद्यालयों में लागू करने और हर बच्चे को समान अवसर, सम्मान तथा अपनी बात रखने की आजादी देने का आग्रह किया।
समापन समारोह में सभी शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में प्रशिक्षण से मिली सीख को लागू करने और विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनशीलता, सामाजिक समरसता, जिम्मेदारी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।