खुर्शीद क्लब प्रदर्शनी GST टिकट पर सवाल |
खुर्शीद क्लब मैदान में लगी प्रदर्शनी को लेकर GST व्यवस्था पर उठे सवालों के बाद अब प्रदर्शनी संचालक की ओर से एंट्री काउंटर से लेकर झूला कॉम्बो के रेट तक GST के बोर्ड लगाए गए हैं। हालांकि, बोर्ड लगने के बाद भी टिकटों की व्यवस्था को लेकर सवाल बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिर्फ GST का बोर्ड लगा देने से क्या यह साबित हो जाता है कि प्रदर्शनी की एंट्री और झूलों से होने वाली टिकट बिक्री का पूरा टैक्स सरकार के खाते में जमा हो रहा है?
टिकटों पर मुहर और तारीख को लेकर सवाल
बताया जा रहा है कि प्रदर्शनी की 40 रुपये वाली एंट्री टिकट पर संचालक की फर्म की मुहर, हस्ताक्षर और तारीख नहीं है। इसी तरह विद्युत उपकरणों से चलने वाले झूलों के टिकटों पर भी मुहर और हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे में सवाल है कि रोजाना कितने टिकट बिक रहे हैं, उनसे कितनी रकम मिल रही है और उस बिक्री के हिसाब से कितना GST सरकार के खाते में जमा किया जा रहा है?
बोर्ड के साथ रिकॉर्ड भी जरूरी
GST का रेट बोर्ड लगाना एक बात है, लेकिन असली सवाल टिकट बिक्री के रिकॉर्ड का है। अगर पूरी व्यवस्था नियमों के मुताबिक है, तो टिकट बिक्री का रिकॉर्ड, GST पंजीयन और जमा किए गए टैक्स की जानकारी जांच के दौरान सामने आनी चाहिए।
साथ ही यह भी सवाल है कि मनोरंजन विभाग के GST व्यवस्था में विलय के बाद इस पूरे मामले की निगरानी किस विभाग या अधिकारी की जिम्मेदारी है और मौके पर टिकट व्यवस्था की जांच किस अधिकारी ने की?
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल प्रदर्शनी संचालक और संबंधित विभाग व्यवस्था को सही बता रहे हैं, लेकिन टिकटों पर मुहर, हस्ताक्षर और तारीख न होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में हमारी टीम टिकट बिक्री, GST, झूलों की सुरक्षा, बिजली व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
मामला किसी को दोषी ठहराने का नहीं है। सवाल सिर्फ इतना है कि जनता से ली जा रही रकम का पूरा हिसाब रखा जा रहा है या नहीं और सरकार के राजस्व का एक-एक रुपया सही तरीके से जमा हो रहा है या नहीं।
इस मामले में GST विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर से भी बातचीत हुई है। विभाग से मिली जानकारी और जांच के आधार पर जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जाएगी।