आजमगढ़ कांड में आरोपी एनकाउंटर में ढेर |
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को हुई सनसनीखेज घटना के बाद आरोपी अरविंद सिंह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। आरोप है कि अरविंद ने अपनी पत्नी और पूजा कराने आए दो पंडितों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने अपने तीन बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया। इस दौरान उसके बेटे को भी गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक, देर रात कार्रवाई के दौरान अरविंद ने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और उसकी मौत हो गई।
चार दिनों से घर में चल रही थी पूजा
बताया जा रहा है कि अरविंद के घर में पिछले चार दिनों से पूजा-पाठ और कथित झाड़-फूंक चल रही थी। मंगलवार शाम अरविंद घर पहुंचा और उसने पूजा कराने आए पंडितों से उनका आधार कार्ड मांगा। इसी दौरान विवाद बढ़ गया।
आरोप है कि इसके बाद अरविंद ने घर में रखी पिस्टल से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबिता और दो पंडित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई।
घटना के बाद अरविंद अपने बच्चों के साथ एक कमरे में बंद हो गया। परिवार में उसकी दो बेटियां—11 वर्षीय परी और 11 महीने की शानवी—और एक बेटा भी था।
पुलिस के पहुंचने के बाद भी उसने सरेंडर नहीं किया और बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने लगा। इसी दौरान उसके बेटे को गोली लगी। बच्चे को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
पुलिस कार्रवाई में अरविंद की मौत
स्थिति को देखते हुए पुलिस और ATS की टीम ने कार्रवाई शुरू की। कमांडो कमरे में दाखिल हुए तो पुलिस के अनुसार अरविंद ने उन पर भी फायरिंग की। जवाबी फायरिंग में अरविंद को गोली लगी और उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद परिवार में अरविंद की मां और उसकी दो बेटियां बची हैं।
2017 से परिवार में चले आ रहे थे विवाद
घटना के बाद अरविंद के परिवार के पुराने विवाद भी सामने आए हैं। उसकी मां शमला देवी के मुताबिक, परिवार की परेशानियां वर्ष 2017 से शुरू हुई थीं।
उनका कहना है कि 2017 में अरविंद की पत्नी बबिता के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इसमें परिवार के पट्टीदार मनीष सिंह और अवनीश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। दोनों जेल भी गए थे और बाद में बाहर आ गए।
परिवार का दावा है कि इसके बाद अरविंद का अपहरण भी हुआ और उसे कई महीनों तक झारखंड में रखा गया था। इन मामलों को लेकर परिवार और पट्टीदारों के बीच विवाद चलता रहा।
2018 में भाई की हुई थी हत्या
अरविंद की मां के मुताबिक, वर्ष 2018 में उसके भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की हत्या कर दी गई थी। यह घटना रामायण के दौरान काली माई के स्थान पर होने की बात कही गई है।
परिजनों के मुताबिक इस मामले में पट्टीदार प्रमोद और विनोद के नाम सामने आए थे और वे कुछ समय के लिए जेल भी गए थे। परिवार का कहना है कि गुड्डू ने पोल्ट्री फार्म बनाया था और पुणे में लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ गार्ड का काम भी करता था।
मां का दावा- 2019 से मानसिक रूप से परेशान था अरविंद
अरविंद की मां का कहना है कि पत्नी से जुड़े मामले, अपने कथित अपहरण और भाई की हत्या जैसी घटनाओं के बाद अरविंद मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। उनके मुताबिक वर्ष 2019 के बाद उसकी परेशानी बढ़ गई थी।
परिवार के मुताबिक, इसी दौरान किसी पंडित ने कथित तौर पर परिवार को अरविंद पर 'प्रेत बाधा' होने की बात कही थी। इसके बाद घर में पूजा-पाठ शुरू कराया गया था।
हालांकि अरविंद की मानसिक स्थिति को लेकर परिवार की ओर से किए गए दावों की चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। एक ही परिवार से जुड़ी इस घटना में अरविंद, उसकी पत्नी, बेटे और दो पंडितों समेत पांच लोगों की मौत हुई है।