एशियन गेम्स भारत तीरंदाजी गोल्ड |
एशियन गेम्स में बुधवार की सुबह भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहद खास रही। कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में भारत ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष टीम ने फाइनल में चीन को 238-237 से हराकर दिन का तीसरा तीरंदाजी गोल्ड अपने नाम किया। इससे पहले महिला टीम और मिश्रित टीम भी स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं।
युवा तिकड़ी ने दिलाया पुरुष टीम को गोल्ड
भारत की पुरुष कंपाउंड टीम में 21 वर्षीय कुशल दलाल, 25 वर्षीय साहिल राजेश और 20 वर्षीय मणि रत्नम गणेश थिरुमुरु शामिल थे। इस युवा तिकड़ी ने दबाव के बीच धैर्य बनाए रखा और भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
चीन के खिलाफ फाइनल में तीन राउंड यानी 18 शॉट के बाद भारत एक अंक से पीछे था। उस समय चीन के 179 अंक थे, जबकि भारत का स्कोर 178 था। इसके बाद आखिरी राउंड में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की।
आखिरी छह शॉट में चीन के एक तीरंदाज ने आठ अंक का निशाना लगाया। इसका फायदा भारतीय टीम को मिला और उसने बढ़त बना ली। अंत में भारत ने 238 अंक हासिल किए, जबकि चीन 237 अंक पर रहा। इस तरह भारत ने एक अंक के अंतर से फाइनल जीतकर गोल्ड अपने नाम कर लिया।
कंपाउंड के तीनों इवेंट में भारत को स्वर्ण
भारत ने बुधवार को कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में गोल्ड जीता। सबसे पहले चिकिथा तानिपर्थी, पृथिका प्रदीप और ज्योति सुरेखा वेन्नम की महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता।
इसके बाद चिकिथा और साहिल जाधव की मिश्रित टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर भारत को दूसरा गोल्ड दिलाया। पुरुष टीम ने चीन को हराकर तीरंदाजी में भारत की गोल्डन हैट्रिक पूरी कर दी।
पांच घंटे में भारत के खाते में चार गोल्ड
बुधवार की सुबह भारत के लिए शानदार रही। कंपाउंड तीरंदाजी के तीन स्वर्ण पदकों के अलावा भारतीय शूटिंग टीम ने भी मिक्स्ड ट्रैप में गोल्ड जीता।
नीरू ढांडा और किनान चेनाई की जोड़ी ने मिक्स्ड ट्रैप में भारत को स्वर्ण दिलाया। इस तरह करीब पांच घंटे के अंदर भारत के खाते में चार गोल्ड आ गए। इसके अलावा भारत ने मुक्केबाजी में दो कांस्य पदक भी जीते। प्रिया घंघस और कपिल पोखरिया ने कांस्य अपने नाम किया।
भारत के 59 पदक पूरे
पुरुष कंपाउंड टीम के स्वर्ण पदक के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 59 हो गई है। भारत के खाते में अब 10 स्वर्ण, 21 रजत और 28 कांस्य पदक हैं।
कंपाउंड तीरंदाजी में तीनों स्वर्ण पदक जीतना भारतीय दल के लिए बड़ी उपलब्धि रही और इससे पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हुई।