यूपीआई शुल्क सुप्रिया श्रीनेत |
कांग्रेस की AICC सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने UPI के नए Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने से आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ेगा।
हालांकि, सरकार और NPCI के अनुसार नया MDR 15 अक्टूबर 2026 से पात्र Person-to-Merchant यानी P2M लेन-देन पर लागू होगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और Person-to-Person यानी P2P भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा और इसे टैक्स नहीं माना जाएगा।
सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि जब UPI सिस्टम को चलाने के लिए सरकार और RBI के पास संसाधन हैं, तो व्यापारियों पर शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों और पेमेंट ऐप्स को फायदा हो सकता है और इसे अमेरिका के दबाव से जोड़कर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि लोगों पर अतिरिक्त बोझ क्यों बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि UPI का खर्च सरकार और RBI क्यों नहीं उठा सकते और क्या भविष्य में दूसरी डिजिटल भुगतान सेवाओं पर भी शुल्क लगाया जा सकता है।
सुप्रिया श्रीनेत ने UPI को पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रखने और नए MDR ढांचे को वापस लेने की मांग की है।
वहीं, सरकार और NPCI का कहना है कि MDR का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता, तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा में निवेश को बनाए रखना है। नए ढांचे के तहत MDR का भुगतान मर्चेंट पक्ष से होगा, ग्राहक से नहीं।